किशोर न्याय बच्चों की देखभाल और संरक्षण विधेयक 2015

किशोर न्याय बच्चों की देखभाल और संरक्षण विधेयक 2015

 वर्ष 1986 तक किशोर अधिनियम में किसी व्यक्ति को किशोर तभी माना जाता था जब उसने 16 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो। परंतु वर्ष 2002 में हुए ‘संयुक्त राष्ट्र मानव कन्वेंशन’ चार्टर के आलोक में किशोर की मानक उम्र में वृद्धि करके इसे 18 वर्ष कर दिया गया। तात्पर्य है की अब ऐसे व्यक्ति जिन्होंने 18 वर्ष की उम्र के हो गए हैं उन्हें किशोर की श्रेणी में रखा जाएगा।

फिर भी अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के रिपोर्ट के अनुसार 16 से 18 वर्ष के उम्र के लोगों ने ज्यादातर जघन्य अपराधों को अंजाम दिया है (ऐसे अपराध जिसमे 7 वर्ष या इससे अधिक की सजा का प्रावधान है) ऐसे व्यक्ति को एक वयस्क की श्रेणी में रखा  जाना यथोचित होगा। इस दिशा में ‘जिला किशोर न्याय बोर्ड’ का गठन किया गया है जिसके अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट को बनाया गया है। बाकी के दो सदस्य सामजिक कार्यकर्ता होंगे, जो मिलकर किसी अभियुक्त के किशोर अथवा वयस्क होने का निर्णय करेंगे।

भारत संयुक्त राष्ट्र मानव कन्वेंशन द्वारा स्थापित बाल्यधिकार जिसे ‘बीजिंग नियम’ से भी जाना जाता है , से पीछे हट रहा है, जिसके अनुसार 18 वर्ष के व्यक्ति को किशोर घोसित किया गया है।

प्रस्तावित विधेयक के पक्ष में तर्क

  1. चूँकि 18 वर्ष तक बालकों का उम्र एवं उनका जैविक विकास होता है ,तो इसके कोई साक्ष्य नहीं है कि उस उम्र तक वह परिपक्व हो चुके होंगे।  
  2. किशोर द्वारा किये गए अपराध वास्तव में निचले स्तर तक आ गए हैं।
  3. सिवाय एक मामले (निर्भया केस) के सन्दर्भ में कानून में बदलाव नहीं करना चाहिए। इस नए अधिनियम से बहुत सारे बच्चे प्रत्यक्षतः प्रभावित होंगे।
  4. बहुत बड़ी मात्र में ऐसे गरीब तबके के बच्चे हैं जिनके पास अपनी आयु को सत्यापित करने के लिए प्रमाणपत्र नहीं है, अतः संभव है कि ऐसे सभी बच्चों को वयस्क की श्रेणी में माना जाये।
  5. अनेकों बच्चे ड्रग्स और अन्य नशीली पदार्थों के आदि हैं जिसे समाज स्वीकार नहीं करता। सर्वप्रथम सरकार का प्रयास इस समस्या को दूर करना होना चाहिए। कानून में संशोधन एकमात्र आधार नहीं हो सकता किशोर अपराध के समाधान हेतु।

प्रस्तावित विधेयक के पक्ष में तर्क

  1. सच है कि इस नए कानून से मासूम एवं निर्दोष बच्चों के ऊपर नकारात्मक प्रभाव पडेगा परंतु बच्चों द्वारा जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद अभियुक्त को मासूम और निर्दोष साबित कैसे किया जा सकता है? उदाहरण के लिए दहेज़ संबंधी मृत्यु के मामले में विवाह के 7 वर्ष के भीतर यदि साथी खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाटा तो उसे दोषी मान लिया जाता है। ऐसी व्यवस्था और प्रावधान पीड़ितों को न्याय दिलाने का एक माध्यम है।
  2. यदि एक किशोर द्वारा प्रतिबद्ध अपराध के कारण किसी की मृत्यु हो जाये तो अभियुक्त के किशोर होने का बहाना बनाकर उसे बक्शा नहीं जा सकता। ऐसे जघन्य अपराध करने वाले किशोरों को वयस्क के रूप में घोसित करने की कोशिश की जा रही है।
  3. दूसरे नजरिये से देखा जाये तो इस नए कानून के द्वारा मासूम बच्चों को फंसा दिया जायेगा ऐसा कहना गलत है । यह कानून मासूम और निर्दोष बच्चों की सुरक्षा के लिए सुरक्षाप्रणाली का प्रावधान भी करता है। क्योंकि एक जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित किशोर न्याय बोर्ड जो किसी व्यक्ति के द्वारा किये गए जघन्य अपराध के मामले में जो( 16 -18 वर्ष) लिप्त होंगे उन सभी को वयस्क मानकर व्यवहार करेगा।
  4. भारतीय प्रणाली में ऐसे कई सुरक्षा प्रणाली है जो ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रदान करती हैं। जैसे  एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को बिना मजिस्ट्रेट के अनुमति के बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। विश्व में कई सभ्य देशों ने अपने यहाँ मृत्युदंड पर रोक लगा दी है, परंतु भारतीय न्यायिक प्रणाली में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ अपराध की श्रेणी बनाकर मृत्युदंड पर एक व्यवस्थित प्रावधान और कानून का निर्माण किया है। जो मृत्युदंड की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिन्ह की सम्भावना को न्यून कर देता है। ताकि विभिन्न हितधारकों के अधिकार और मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित हो सके।
  5. अन्य कानूनी प्रावधानों का दुरूपयोग होता है मसलन( POTA, TADA) जैसे तर्क देकर इस सुरक्षा प्रणाली मे संशोधन नहीं करना चाहिए जैसी बाते निरर्थक हैं।
  6. किशोरों के लिए दंड न तो मृत्युदंड है और न ही आजीवन कारावास है बल्कि यह केवल तीन वर्ष की सजा है।

समय की मांग के अनुसार बच्चों के लिए बेहतर पुनर्वास की सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार ने बजट में बड़ी राशि का प्रावधान किया है। किशोर को सजा और उनके सुधार और पुनर्वास के बीच एक संतुलन होना चाहिए।

One Comment

  1. S P Singh
    Mar 13, 2018 at 3:48 am

    बच्चों काअपराध मेआना बहुत चिन्ता जनक है। शातिर अपराधी बच्चों काउपयोगअपराध करवाने मे कर रहे है।अत किशोरावस्था किआयु मात्र १० वर्ष होनी चाहिए ।

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