कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिब्लिटी : सीएसआर

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कंपनियों का सामाजिक दायित्व, जिसे अंग्रेजी में कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिब्लिटी कहते हैं, केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आता है। इस सम्बन्ध में नियम-कानून वही बनाता है। राज्य सरकारें उन नियमो के तहत अपने राज्य के लोगो के सामजिक लाभ के लिए इन कंपनियों से खर्च कराती हैंसीएसआर के नियम को लेकर केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलो के मंत्रालय ने इस साल 27 फरवरी को अधिसूचना जारी की है। इस नियम में कुछ नए प्रावधान भी किये गए हैं।

किन कंपनियों पर सीएसआर नियम लागूइस नए नियम के अनुसार वैसी कंपनियां, जिन्हें भारी मुनाफा होता है, उन्हें अपने मुनाफे का कम से कम 2% हिस्सा वैसी गतिविधियों पर व्यय करना है, जो उस क्षेत्र के लोगों के सामजिक, आर्थिक, शैक्षिणिक, नैतिक और स्वास्थ्य आदि में सुधार के लिए हो तथा जिससे उस क्षेत्र की आधारभूत संरचना, पर्यावरण और सांस्कृतिक विषयों को बढ़ाने में मदद मिल सके।

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इस तरह की गतिविधियों के जरिये वहां के सामजिक विषयों के विकास में योगदान करना इन कंपनियों की सामाजिक जिम्मेवारी है। इसे ही सीएसआर कहते हैं। यानी भारी मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को समाज की भलाई में अपनी कमाई को समाज की भलाई में अपनी कमाई का कम से कम 2% व्यय करना है।

नए नियम में इन कंपनियों को इस तरह चिन्हित किया है:-

  1. ऐसी कंपनी, जिसमे कम से कम 500 करोड़ रूपए निवेश हुआ हो।
  2. ऐसी कंपनी, जिसे एक साल में कम से कम 5 करोड़ रूपए का शुद्ध मुनाफा हुआ हो।
  3. ऐसी कंपनी, जो कम से कम 1000 करोड़ रूपए का कारोबार करती हो।
  4. इन सभी कंपनियों को अपनी कमाई का 2% हिस्सा सीएसआर गतिविधियों में खर्च करना है।

मुनाफे में शामिल नहीं

कंपनियों के मुनाफे की गणना करते समय विदेशी शाखाओं से होने वाले लाभ और भारत में दूसरी कंपनियों से मिलने वाले लाभांश को मुनाफे से बाहर रखा गया है। उसी प्रकार सीएसआर गतिविधियों से बचा पैसा कंपनी के मुनाफे का हिस्सा नहीं होगा।

सीएसआर में खर्च की राशि की गणना 

नियम के मुताबिक सीएसआर के दायरे में आने वाली कंपनियों को अपनेतीन साल के औसत वार्षिक शुद्ध लाभ का 2% हिस्सा इस तरह की गतिविधियों पर हर वर्ष व्यय करना है। वर्ष का मतलब वित्तीय वर्ष है। यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च । यानी नया नियम इस वित्त वर्ष से लागू है।

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हर कंपनी की सीएसआर

नियम के मुताबिक़ कंपनियों को अपनी सीएसआर निति बनानी होती है। उस निति की उन्हें घोसणा में उन्हें पुरे वित्त वर्ष के लिए अपनी योजनाओं, गतिविधियों, कार्यक्रमों और परियोजनाओं का स्पस्ट उल्लेख करना होता है। उन्हें बताना होता है की वे अपने लाभ का 2% राशि किस क्षेत्र में, किन के बीच और किस प्रकार व्यय करेंगे।

राजनितिक दल को लाभ नहीं

सीएसआर गतिविधि के तहत किसी पंजीकृत संस्था या ट्रस्ट को कोई कंपनी धन दे सकती है। उस संस्था द्वारा कंपनी की सीएसआर निति और उसके कार्यक्रम के अनुसार वह राशि को व्यय कर सकती है। उसे उक्त कंपनी अपनी सीएसआर रिपोर्ट में उल्लेखित करेगी, लेकिन किसी राजनितिक दल को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ नहीं प्राप्त हो सकता क्योंकि राजनितिक दल को किसी भी प्रकार से और किसी भी गतिविधि के लिए दी गयी राशि सीएसआर को अलग-अलग रखने के लिए किया गया है,ताकि कोई सत्तारूढ़ या प्रभावशाली राजनितिक दल किसी कंपनी से सीएसआर के नाम पर मोटी रकम लेकर उसे अपने राजनितिक हितों की पूर्ति में न इस्तेमाल करें।

Comments (2)

  1. bhumikamaurya@gmail.com
    Apr 16, 2016 at 11:59 pm

    Sir please lecture bhi provide kar dijiye thank you sir for a such great effort for hindi medium

  2. shailendra
    May 08, 2016 at 2:58 am

    सुंदर प्रयास,शुभकामनाएँ आप सभी को
    और भी issues अपडेट करते रहिये,
    Lectures भी पासिबल हो तो और बेहतर होगा

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