द हिन्दू “SOUNDING THE SMOKE” (हिंदी अनुवाद)

The-Hindu-Logo-Squ_2675308g (2)THE HINDU – “SOUNDING THE SMOKE” (FOR ENGLISH CLICK)

तंबाकू सेवन के खतरों के प्रति जनचेतना आवश्यक

interdit-fumerकिशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के कारण भारत की तंबाकू कंपनियों द्वारा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू की ओर लुभाने पर कुछ अंकुश लगा है, अधिनियम के  अनुसार कोई भी व्यक्ति जो अल्पवयस्क को तंबाकू उत्पाद बेचने का दोषी पाया जाएगा उसे 7 वर्ष तक का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये तक का अर्थदंड देना होगा

 लंबे समय से उन व्यक्तियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान करने की आवश्यकता बनी हुई थी जो बच्चों को नुकसानदेह सामग्री की बिक्री करते थे क्योंकि निवर्तमान कानूनी प्रावधान ज्यादा कारगर नहीं थे, उदाहरण के लिए, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 के अंतर्गत अल्पवयस्क को तंबाकू उत्पाद बेचने के लिए मात्र ₹200 के अर्थदंड का प्रावधान था जो निवारक उपाय के रूप में पर्याप्त नहीं था अल्पवयस्क को तंबाकू उत्पाद बेचने पर वर्ष 2003 से ही रोक के बावजूद उसकी बिक्री और खरीद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था और यह आसानी से उपलब्ध और प्रचलन में था इस बात की पुष्टि वर्ष 2009-10 के वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण (जीवायटीएस) से भी हुई जहां सर्वेक्षण में शामिल 13-15 आयु वर्ग के 56% प्रतिभागियों को दुकान से सिगरेट खरीदने में कोई परेशानी नहीं हुई जबकि 15-17 वर्ग आयु के ज्यादातर प्रतिभागियों को दुकानदार ने सिगरेट बेचने से मना नहीं किया

 उपभोग स्तर में वृद्धि-

  आसान पहुंच और तंबाकू की आसान उपलब्धता का उपभोग स्तर पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में 13-15 आयु के करीब 15 प्रतिशत (19 प्रतिशत लड़के औरत प्रतिशत लड़कियां) बच्चे किसी ना किसी तंबाकू उत्पाद का प्रयोग करते हैं

  यह भी पाया गया है कि इसी आयु वर्ग के करीब 15.5 प्रतिशत बच्चे जिन्होंने पहले कभी धूम्रपान नहीं किया, वे 1 वर्ष के अंदर इसे शुरू करने के कगार पर  थे, 13-15 आयु वर्ग के स्कूली छात्रों के बीच तंबाकू का कुल उपयोग वर्ष 2006 में 13.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2009 में 14.5 प्रतिशत हो गया

       संभव है कि नाबालिगो द्वारा तंबाकू के उपभोग के ये चौंकाने वाले आंकड़े वास्तविकता से कम ही हूं ज्यादातर स्कूल आधारित रहे इस सर्वेक्षण के दायरे से वे बच्चे बाहर है जो वंचित समूह के हैं और स्कूल प्रणाली से बाहर है संभव है कि वैसे बच्चे तंबाकू उपयोग के और आरंभिक व सघन उपयोगकर्ता हो, कई अध्ययनों में यह पाया भी गया है कि अशिक्षित बच्चों को बच्चों, वे बच्चे जो प्रारंभिक कक्षा तक ही पढ़े लिखे हैं और वे बच्चे जो निम्न आय वर्ग के है उनमे तंबाकू उपभोग ज्यादा उच्च स्तर है

इसके अतिरिक्त वर्ष 2010 के वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण (जीएटीएस) रिपोर्ट में यह दिखाया गया है कि 15-17 आयु वर्ग के करीब 10% बच्चे किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं ग्लोबल हेल्थ प्रमोशन जनरल में  अगस्त 2015 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 15-17 आयु वर्ग के करीब 4.4 मिलियन बच्चे प्रतिदिन तंबाकू उत्पाद का उपयोग करते हैं

Global Youth Tobacco Survey (GYTS) सर्वेक्षण की तरह ही Global Adult Tobacco Survey (GATS) सर्वेक्षण में भी एक बड़ी कमी है, सर्वे रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि कई राज्यों के तंबाकू उपयोगकर्ताओं पर सूचना उपलब्ध नहीं है फिर भी समग्र रूप से दोनों सर्वेक्षणों के निष्कर्षों पर विचार करें तो 18 वर्ष से कम आयु के कुल बच्चों में से करीब एक चौथाई वर्ष 2009 में किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का सेवन कर रहे थे

    यह आकडे इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि बच्चों को तंबाकू सेवन के प्रति आकर्षित करने के लिए विविध रणनीतियों  को अपनाने में तंबाकू कंपनियां कितनी सफल रही हैं एशियन पेसिफिक जनरल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में पिछलें वर्ष प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार 13-15 आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त सिगरेट की पेशकश करके, होर्डिंग पर विज्ञापन लगाकर, दुकानों में तंबाकू उत्पादों को विशेष तरीके से प्रदर्शित करके तथा विज्ञापन बोर्डों को का भ्रामक इस्तेमाल करके कंपनियों ने अपना अभियान चलाया है.

          इन अभियानों का उन्हें फायदा मिला है यह भी स्पष्ट है. 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में रोज तंबाकू की चपेट में आ रहे लोगों की औसत आयु 17.8 है इसमें 14% वे शामिल है जो धूम्रपान (सिगरेट और बीड़ी) करते हैं और करीब 30% वह है जो धूम्ररहित तंबाकू (गुटखा, खैनी, जर्दा आदि) का सेवन करते हैं

बच्चों पर खतरा

       smoking  सवाल यह है कि कंपनियां बच्चों को क्यों लक्ष्य करती है? वर्ष 1994 के यूएस सर्जन जनरल की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियां इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि जितनी कम उम्र में कोई धूम्रपान की शुरुआत करेगा, व्यस्क के रूप में धूम्रपान जारी रखने की उसकी उतनी ही प्रबलता रहेगी, जो कम उम्र से तंबाकू का सेवन शुरू करते हैं वे इसके अधिक आदी होते हैं और देर से सेवन शुरू करने वालों की तुलना में उनकी इस आदत को छोड़ने की संभावना कम होती है

कम उम्र में उपयोग शुरू करने का संबंध लगातार और अधिक उपयोग करने से भी है, कम उम्र के उपभोक्ता इसके खतरों के प्रति कम जागरूक भी होते हैं जो फिर उन्हें तंबाकू कंपनियों का आसान शिकार बनाती है.

 बच्चों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए कड़े दंड की जो पहल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने की है वह सराहनीय है लेकिन असली चुनौती उसके अनुपालन की है, जहां विकसित देशों में सिगरेट लाइसेंस प्राप्त दुकानों में बिकता है वही भारत में तंबाकू उत्पादों की क्षेत्र76 प्रतिशत बिक्री बिना लाइसेंस की छोटी दुकानों व सड़क किनारे के अस्थाई वेंडरों द्वारा की जाती है इस तरह उन्हें नियम के दायरे में लाना एक बड़ी चुनौती है

 तंबाकू से बच्चों का युवाओं को दूर रखने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है इसकी शुरुआत सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 के निर्देश के अनुपालन से की जा सकती है जिसके अंतर्गत विद्यालयों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री और उसके विज्ञापन पर प्रतिबंध आरोपित है इसका अनुपालन प्राथमिकता से करना होगा,

कई अध्ययनों में यह बात प्रमाणित हुई है की उपलब्धता का उपभोग से सीधा संबंध है विद्यालयों में भी इस प्रकार की जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है की बच्चों को तंबाकू के दुष्प्रभाव के प्रति सचेत किया जाए ,

उदाहरण के लिए वर्ष 2012 में पलोस वन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में एक अनूठा कार्यक्रम अपनाया गया जिसके तहत वंचित समूह के स्कूली छात्रों के बीच जीवन कौशल और तंबाकू पर जागरूकता की पहल की गई तो पाया गया उनमें से 50% इस आदत का शिकार होने से बचे रहे

इसके साथ ही ज्यादा प्रभावकारी उपाय जैसे तंबाकू उत्पादों पर करों में वृद्धि और तंबाकू उत्पाद के पैकेटों पर डरावनी सचित्र चेतावनी आसानी से लागू किए जा सकते हैं उपभोग स्तर को घटाने में इनकी दूरगामी भूमिका हो सकती है

चूकि भारतीय कराधान संरचना आय वृद्धि और मुद्रास्फीति से जुड़ी हुई नहीं है अतः आय सामर्थ्ययता की तुलना में तंबाकू उत्पाद सस्ते होते हैं तंबाकू उत्पादों पर करो की समीक्षा प्रत्येक वर्ष करनी चाहिए और उसमें वृद्धि करनी चाहिए मूल्य में तेज वृद्धि से एक तरफ बच्चों को इनकी ओर आकर्षित होने से हतोत्साहित किया जा सकेगा तो दूसरी तरफ बहुतों को इस आदत को छोड़ने की प्रेरणा मिलेगी पिछले 2 बजटो में तंबाकू उत्पादों पर कर वृद्धि से उनके उपभोग स्तर व बिक्री में थोड़ी कमी आने की बात प्रमाणित ही हुई है.

Global youth tobacco survey (GYTS)

Background

In December 1998, TFI convened a meeting in Geneva with the Centers for Disease Control and Prevention (CDC), the United Nations Children’s Fund (UNICEF), the World Bank and representatives from countries in each of the six WHO regions to discuss the need for standardized mechanisms to collect youth tobacco use information on a global basis. The outcome of this meeting was the development by WHO and CDC of a Global Tobacco Surveillance System, which uses the Global Youth Tobacco Survey (GYTS) as its data collection mechanism.

Description

The GYTS is a school-based survey designed to enhance the capacity of countries to monitor tobacco use among youth and to guide the implementation and evaluation of tobacco prevention and control programmes. The GYTS uses a standard methodology for constructing the sampling frame, selecting schools and classes, preparing questionnaires, following consistent field procedures, and using consistent data management procedures for data processing and analysis. The information generated from the GYTS can be used to stimulate the development of tobacco control programmes and can serve as a means to assess progress in meeting programme goals. In addition, GYTS data can be used to monitor seven Articles in the WHO FCTC.

GYTS essential indicators

GYTS is composed of 56 “core” questions designed to gather data on the following seven domains. The questionnaire also allows countries to insert their own country-specific questions.

  • Knowledge and attitudes of young people towards cigarette smoking
  • Prevalence of cigarette smoking and other tobacco use among young people
  • Role of the media and advertising in young people’s use of cigarettes
  • Access to cigarettes
  • Tobacco-related school curriculum
  • Environmental tobacco smoke (ETS)
  • Cessation of cigarette smoking

 

Global Adult Tobacco Survey (GATS)

The Global Adult Tobacco Survey (GATS) is a nationally representative household survey that was launched in February 2007 as a new component of the ongoing Global Tobacco Surveillance System (GTSS). The GATS enables countries to collect data on adult tobacco use and key tobacco control measures. Results from the GATS assist countries in the formulation, tracking and implementation of effective tobacco control interventions, and countries are able to compare results of their survey with results from other countries.

Topics covered in GATS:

  • Tobacco use prevalence (smoking and smokeless tobacco products).
  • Second-hand tobacco smoke exposure and policies.
  • Cessation.
  • Knowledge, attitudes and perceptions.
  • Exposure to media.
  • Economics.

KEYWORD  : किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015  Global Youth Tobacco Survey (GYTS) Global Adult Tobacco Survey (GATS)

Comments (3)

  1. Mathur singh meena
    May 02, 2016 at 6:34 pm

    lot of thank all team ko

  2. lakshaya saini
    May 03, 2016 at 1:05 am

    Sir ap jo ye photo lgate ho article k sath use thoda or clear or kuch thoda bda lga de to bhut acha hoga qki photo dikh to rha h but kya likha h he ni sanmj me aa rha h

    Thanks sir for all of thi s

  3. S Dev
    May 03, 2016 at 1:15 am

    Thanks a lot sir… bhoot hi sunder.. aap please ise print formate me available kra dijiye

Leave a Comment

Your email address will not be published.