पाकिस्तान एवं चीन ने एक विशेष निगरानी उपग्रह छोड़े जाने के लिए समझौता किया

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पाकिस्तान एवं चीन ने CPEC हेतु एक विशेष निगरानी उपग्रह छोड़े जाने के लिए समझौता किया

  • 20 अप्रैल 2016 को पाकिस्तान एवं चीन ने एक विशेष उपग्रह छोड़े जाने के लिए समझौता किया. यह उपग्रह चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर (सीपीईसी) की निगरानी हेतु छोड़ा जायेगा.
  • पाकिस्तान के योजना, विकास और सुधार मंत्री एहसान इकबाल ने पाकिस्तानी अंतरिक्ष एवं वायुमंडल अनुसंधान आयोग की ओर से एवं चाइना ग्रेट वॉल इंडस्ट्री को-ऑपरेशन के अध्यक्ष यिन लिमपिंग ने पाकिस्तान स्थित इस्लामाबाद में समझौते पर हस्ताक्षर किये.
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में इस द्विपक्षीय सहयोग से दोनों देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक और वैज्ञानिक सहयोग के नए क्षेत्र खुलेंगे.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर (सीपीईसी)

सीपीईसी 46 बिलियन अमेरिकी डॉलर की एक परियोजना है जिससे पश्चिमी चीन एवं दक्षिणी पाकिस्तान में संपर्क स्थापित किया जा सकेगा. इससे बीजिंग को अरब सागर में प्रवेश  प्राप्त होगा.

CPECसीपीईसी समझौते के मुख्य बिंदु

•    दोनों पक्षों ने पाकिस्तान रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट (पीआरएसएस-1) सिस्टम लांच करने हेतु सहमति व्यक्त की, यह सेटेलाइट जून 2018 को छोड़ा जायेगा.
•    अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सामाजिक-आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के उन्नयन, कृषि उत्पादन, शहरी नियोजन में नए युग का मौलिक भाग है.
•    इस समझौते से पाकिस्तान में अन्तरिक्ष तकनीक का स्थानान्तरण किया जायेगा तथा पीआरएसएस-1 चीन-पाकिस्तान के संबंधों में प्रगाढ़ता स्थापित करने में सहायता करेगा.
•    इससे पाकिस्तान की सीमा सुरक्षा में भी सुधार होगा.

भारतीय संदर्भ में उपरोक्त  परियोजना 

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 2015 में इस्लामाबाद की यात्रा के पश्चात् किये गये इस समझौते का भारत शुरू से ही विरोध करता आ रहा है.

भारत का मानना है कि इस कॉरिडोर से देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है

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