प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस सब्सिडी

 मुद्दा – प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस सब्सिडी के निहितार्थ 

LPG_For_BPL_cabinet_10_03प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्त्वाकांक्षी योजना शुरू की है जिसके तहत 5 करोड़ गरीब परिवारों को घरेलू गैस कनेक्शन दिए जाने हैं। ये कनेक्शन घर की महिला सदस्यों के नाम पर जारी किए जाएंगे जो गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवार की सदस्य हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना नामक यह योजना तीन साल तक चलेगी और पहले साल इसमें 1.5 करोड़ लोगों को कनेक्शन दिए जाएंगे। इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।

पूरी योजना का भार केंद्र सरकार वहन करेगी जो तकरीबन 8,000 करोड़ रुपये होगा। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में इस योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्रियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे केवल वोटों पर ध्यान देते रहे और गरीबों को ध्यान में रखकर कोई नीति नहीं बना सके। इसमें दो राय नहीं कि मोदी की योजना गरीबों को बहुत लाभ पहुंचाएगी। खराब ईंधन के प्र्रयोग के कारण घर के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण से देश में हर साल 13 लाख मौतें होती हैं। एलपीजी का इस्तेमाल प्रदूषण का स्तर कम करेगा और लोगों का जीवन बेहतर बनेगा।

लेकिन इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह योजना भाजपा की चुनावी संभावनाओं को ताकत प्रदान करेगी। समस्या यह है कि राजनीतिक लाभ राजकोष को नुकसान पहुंचाकर ही हासिल किए जाते हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि योजना में एलपीजी मूल्य सुधार और सब्सिडी को लक्षित करने के क्षेत्र में भी अनदेखी की गई है। योजना की पहली बड़ी चुनौती तो यही होगी कि गरीबों की पहचान की जा सके ताकि उनको सब्सिडी दी जा सके।

गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी के मामले में समुचित और प्रमाणित आंकड़ों के अभाव में यह काम आसान नहीं। सरकार सामाजिक-आर्थिक जातीय गणना के आंकड़ों पर निर्भर है लेकिन वे पर्याप्त नहीं। हो सकता है योजना का दुरुपयोग हो जाए। वितरण चैनलों को मजबूत बनाने और गरीबों को छोटे आकार के गैस सिलिंडर मुहैया कराने के मामले में भी चुनौतियां कम नहीं हैं। दूसरी बात, योजना में आधार से जुड़े प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण का प्रयोग किए जाने की संभावना नहीं है। इस योजना में नकदी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जाती है।

ऐेसे में सरकार के लिए तेल कंपनियों को सब्सिडी आधारित गैस आपूर्ति से होने वाले उनके घाटे की सीधी भरपाई करनी होगी। इसमें तमाम संबंधित समस्याएं सामने आएंगी, मसलन लीकेज, भुगतान में देरी, तेल विपणन कंपनियों को वित्तीय क्षति आदि। आधार से जुड़ी योजना का लाभ यह है कि वह तेल कंपनियों को होने वाले पुनर्भुगतान में देरी की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर देती है।

एलपीजी के मूल्य निर्धारण और सब्सिडी सुधार के भविष्य से जुड़ी समस्याएं आगे सर उठा सकती हैं। सरकार को अभी भी आर्थिक रूप से संपन्न तबके की घरेलू गैस सब्सिडी समाप्त करने का कदम उठाना है। हालांकि सरकार ने एक निश्चित आय वर्ग से नीचे रहने वालों तक सब्सिडी को सीमित करके अपने इरादे जता दिए हैं। इसके बजाय सरकार घरेलू गैस उपभोक्ताओं के अपनी सब्सिडी को स्वेच्छा से त्यागने पर भरोसा कर रही है। कहा जा रहा है कि अब तक एक करोड़ परिवार अपनी सब्सिडी छोड़ चुके हैं। स्वैच्छिक घोषणा से सब्सिडी छोडऩे से होने वाली बचत मददगार हो सकती है लेकिन यह दीर्घावधि का स्थायी उपाय नहीं है।

अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी कम हैं। सरकार को बिना समय गंवाए आय और परिसंपत्ति के आधार पर सब्सिडी का मानक तय करना चाहिए। ऐसा करने से एक खास आय से ऊपर के लोगों को मिलने वाली सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। नई योजना के समक्ष कई चुनौतियां हैं जिनसे निजात पानी होगी।

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