मुद्दा :-शिक्षा -उत्पादन एवं विज्ञान पर जनसंख्या वृद्धि के कारण पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों की समीक्षा

विषय : शिक्षा स्वास्थ्य और विकास एवं जनसंख्या वृद्धि के मध्य विरोधाभास

indias-population-1274239769-and-growing-as-per-national-population-stabilization-fund-record-on-world-population-day-12321भारत की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है किसी एक परिवार को देखकर जनसंख्या बढ़ने का पता नहीं लगता क्योंकि परिवार में सदस्यों की संख्या संख्या यदि 4 से 6 हो जाती है तो किसी न किसी तरह घर के बड़े सदस्य दुखी एवं सुखी होकर अपनी आय के द्वारा सब सदस्यों के खर्च का प्रबंध कर ही लेते हैं परंतु जनसंख्या बढ़ने का सबसे अधिक प्रभाव सारे देश की सामुहीक अर्थव्यवस्था को देखकर तब महसूस होता है जब सरकारों के सामाजिक प्रयास बड़ी-बड़ी राशियां खर्च करने के बाद भी दिखाई नहीं देते अंतरराष्ट्रीय स्तर के अर्थशास्त्रियों का भी यही मत है कि जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक उन्नति का परस्पर विरोधी चलता है जितनी जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है उतना ही आर्थिक पतन होता चला जाता है

प्रभाव के विभिन्न संदर्भ

जनसंख्या वृद्धि प्रभाव पर यदि हम चिंतन प्रारंभ करें तो हमें साक्षात महसूस होगा कि समाज की बहुतायत समस्याओं का कारण केवल जनसंख्या वृद्धि है. देश में अनाज की कमी, पानी की कमी, वायु प्रदूषण की समस्या, तेल और गैस की बढ़ती कीमतें, ईधन के अन्य साधन और ऊपर से गुजरती सूर्य की किरणों से भी प्रदूषण का पैदा होना जंगलों का कटाव तथा खेती की भूमि का लगातार कम होना आदि अनेक समस्याएं केवल जनसंख्या वृद्धि के कारण लगातार भयंकर रूप लेती जा रही है. जनसंख्या वृद्धि के कारण ही समाज में भीड़ बढ़ रही है सरकार और पुलिस का नियंत्रण बढ़ती जनसंख्या के कारण कम होता जाता है, परिणाम स्वरुप तरह-तरह  के अपराध बढ़ रहे हैं. विडंबना यह है कि जितने अपराध पुलिस और अदालतों के समक्ष प्रस्तुत होते हैं उससे कहीं अधिक संख्या ऐसे अपराधों की भी होती है जिनके विरुद्ध पुलिस में शिकायतें ही नहीं पहुंच पाती. समाज में मानव बढ़ते जा रहे हैं परंतु मानवता के लक्षण समाप्त होते जा रहे हैं जनसंख्या वृद्धि का प्रकोप राजनीति और लोकतंत्र पर भी देखने को मिलता है

भारत को विश्व का सबसे समृद्ध लोकतंत्र माना जाता है परंतु क्या हमारे लोकतंत्र की सफलता केवल समय पर चुनाव कराने के लक्षण तक ही सीमित है? आज के युग में क्या हमारे लोकतंत्र ने किसी भी विषय पर जनता की राय लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया है ? नहीं क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या को शामिल करते हुए ऐसे प्रक्रिया संभव ही नहीं. जनसंख्या बढ़ने के कारण ही लाचार अर्थव्यवस्था में हर वस्तु की कीमतें बढ़ती जा रही हैं गांव और खेती में लोगों की रूचि समाप्त होने का कारण भी जनसंख्या वृद्धि ही है कृषि की कम होती जोतों पर घर के दो व्यक्ति कृषि का कार्य करें तो भी उतनी ही कमाई और चार व्यक्ति कार्य  करें तो भी उतनी ही कमाई इसलिए हर परिवार यह सोचता है कि दो व्यक्तियों को शहर किसी नए  रोजगार की तलाश  के लिए क्यों ना भेज दिया जाए. परिणामस्वरुप खेती तो लगातार कमजोर होती जा रही है और शहरों में रोजगार बनाम बेरोजगारी का द्वंद तेज होता जा रहा है शहर की जनसंख्या बढ़ने के कारण वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है गाड़ियों के सम विषम नंबरों के आधार पर अलग अलग दिन चलने का नियम बनाकर नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं .

बढ़ती जनसंख्या के कारण बहुमंजिला इमारतों का प्रचलन तेज होता जा रहा है हर व्यक्ति जानता है कि बहु मंजिला इमारतें सदैव खतरे का कारण  बनी रहती है संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न संस्थाएं जब  शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों और बच्चों का अनुपात निर्धारित करती है तो हमारी सरकारें उस अनुपात का अनुपालन नहीं कर पाती कारण, अधिक जनसंख्या के कारण एक कक्षा में अधिक बच्चों को प्रविष्ट करना पड़ता है. इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि रोगियों की एक निर्धारित संख्या पर एक डॉक्टर के अनुपात का निर्देश जारी होता है तो जनसंख्या वृद्धि के कारण हम उसका भी पालन नहीं कर पाते जिसके परिणाम स्वरुप भारी संख्या में रोगियों को जांचने की जिम्मेदारी एक चिकित्सक पर आ जाती है इसी प्रकार पुलिस की संख्या और नागरिकों की संख्या के अंतरराष्ट्रीय अनुपालन का भी हम अनुसरण नहीं कर पाते हैं यही हालात न्यायपालिका के समक्ष भी है, न्यायधीशों और जनसंख्या अनुपात पर भी देखने को मिल रही है जिसके कारण सारे देश में लंबित मुकदमों की संख्या प्रतिवर्ष लगातार बढ़ रही है जनसंख्या वृद्धि के कारण ही हम सामाजिक और आर्थिक अपराधों के निवारण की भी कोई योजना लागू नहीं कर पाते .

ice_screenshot_20160430-151919हमारे देश में बढ़ती बेरोजगारी तो सीधा ही जनसंख्या वृद्धि के साथ जुड़ी हुई समस्या है. आज यदि किसी एक पद का विज्ञापन निकलता है तो उस एक पद पर नौकरी चाहने वाले प्रार्थी कई हजारों की संख्या में होते हैं यहां तक की उच्च शिक्षा प्राप्त युवक एक सामान्य क्लर्क और यहां तक के चपरासी के पद के लिए भी आवेदन देने को मजबूर हुआ है .इस लेख का प्रमुख चिंतन इस प्रश्न पर है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कौन क्या कर सकता है संयुक्त राष्ट्र संघ स्वयं सारे संसार की जनसंख्या वृद्धि को लेकर चिंतित है संसद में स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष इस संबंध में एक प्रश्न प्रस्तुत किया गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ भारत को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कितनी सहायता देता है उस सहायता से क्या कार्य किए जाते हैं और उनका क्या परिणाम निकलता है यदि यह परिणाम  संतोषजनक नहीं है तो भारत सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाने की योजना बना सकती है इस प्रश्न के उत्तर में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया संयुक्त राष्ट्र संघ ने विगत 4 वर्षों के दौरान लगभग 1 करोंड़ 65 हज़ार डॉलर की राशि जनसंख्या नियंत्रण के प्रचार तथा स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए भारत सरकार को दी है. इस सहायता कार्य के संतोषजनक परिणाम निकले हैं 1991 से 2001 के दशक में जनसंख्या वृद्धि 21.5 प्रतिशत थी जो 2001 से 2011 के दशक में घटकर 17.7 प्रतिशत पर आ गई है

 भारत सरकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए कई उपाय कर रही है जिन्हें सारे देश में स्वास्थ्य कल्याण केंद्रों के माध्यम से गांव गांव तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ‘आशा’ नामक योजना के माध्यम से विवाह के बाद 2 वर्षों तक बच्चा पैदा न करने पर दंपति को कुछ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है तथा दो बच्चों के बीच में 3 वर्ष का अंतर रखने वाली दंपत्ति को भी यही प्रोत्साहन राशि दी जाती है साथ ही  दो बच्चों के बाद स्थाई रूप से गर्भनिरोधक उपाय करने वाले दंपत्ति को कुछ अधिक प्रोत्साहन राशि प्रस्तावित है परिवार नियोजन 2020 का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है

population-slogans-e1437378365929वैश्विक संदर्भ के परिप्रेक्ष्य में कई देशों के जनसंख्या नियंत्रण के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए हैं जैसे चीन और वियतनाम में किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता केवल पहले दो बच्चों तक ही सीमित रहती है वही ईरान सरकार ने भी परिवार नियोजन को अपने राष्ट्रीय नीति में प्रमुख स्थान दिया है सरकार ने अपने प्रचार कार्यक्रमों में यह स्पष्ट किया है कि इस्लाम दो बच्चों के परिवार का समर्थन करता है इरान सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण के भिन्न-भिन्न प्रकार की औषधियां तथा अन्य गर्भनिरोधक वस्तुएं जनता में बांटनी प्रारंभ कर दी हैं हालांकि 2006 में सत्ता परिवर्तन के बाद इन नीतियों को शीथल कर दिया गया

चिंतनीय पहलू : सामाजिक एवं स्वास्थ्यपरक

  • जनसंख्या वृद्धि से ही जुड़ी कुछ अन्य व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याएं भी काफी होती है विशेष रूप से अधिक बच्चे पैदा करने वाली स्त्रियों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता चला जाता है
  • गर्भाधान के दौरान या बच्चे को जन्म देने देते समय प्रतिवर्ष लाखों महिलाएं दम तोड़ने के लिए मजबूर हो जाती है क्योंकि बार-बार गर्भधारण करने से माताओं का स्वास्थ्य लगातार कमजोर होता चला जाता है
  • 18 वर्ष पूर्ण होने पर मृत्यु की संभावना और अधिक हो जाती है इसी प्रकार 40 वर्ष की आयु के बाद भी गर्भाधान के यही खतरे स्त्रियों के सिर पर मंडराते हैं इसलिए बार-बार गर्भधारण करने के प्रति परिवारों के पुरूषों को भी जागरुक किया जाना चाहिए
  • populationसरकार के स्वास्थ्य प्रयास बहुतायत स्थानीय केंद्रों के माध्यम से महिलाओं तक अपनी पहुंच बना पाते हैं स्वास्थ्य मंत्रालय जनसंख्या नियंत्रण केन्द्रों के साथ-साथ पंचायतों को जोड़ने की विशेष पहल करनी चाहिए जिससे पुरुषों वर्ग को खास तौर पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरुक किया जा सके
  • यदि सरकार अधिक बच्चे पैदा करने की समस्या को मां और बच्चे की योजना के अंतर्गत लाये तो अवश्य ही जनसंख्या नियंत्रण में तेज गति से सफलता प्राप्त होगी सरकारों के साथ साथ भारत के समग्र समाज को एक समान रुप से विचार मंथन करना चाहिए कि यदि शिक्षा स्वास्थ्य चहुंमुखी विकास तथा सुख शांति और समृद्धि चाहिए तो जनसंख्या वृद्धि और नियंत्रण के लिए सब वर्गों को सामूहिक प्रयास करने होंगे

Comments (3)

  1. praveen kurre
    Apr 30, 2016 at 5:46 pm

    sir post date wise ho sake to bahut meharbani hogi. dusri chij pdf mein ho jata to……………..

    • upscgetway
      Apr 30, 2016 at 6:11 pm

      thanks for your suggestion we will try our best

  2. akshay
    May 01, 2016 at 3:53 am

    बहुत ही बढ़िया प्रयास है।।। विभिन्न तरीको से लिखा गया यह उत्तर अपनी संपुड़ता को दर्शाता है विशेष तौर पर राष्ट्रीय एव अंतर्राष्ट्रीय पहलुओ को लेकर और साथ ही भारत सरकार के द्वारा जनसँख्या नियंत्रण के लिए किये जा रहे उपाय सराहनीय है । अंत में आपको बहुत बहुत धन्यवाद ।।

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