योजना : समेकित विकास और शांति क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के उदय का मार्ग (सारांश)

northeast_india_people-257x300समेकित विकास और शांति क्षेत्रीय अर्थ व्यवस्था  के उदय का मार्ग

राजनीतिक स्तर पर हाल की घोषणाओं का अर्थ यह है की उत्तर –पूर्व की ओर देखने की वजाय दक्षिण और पच्छिम की ओर देखने की आवश्यकता है | क्यूंकि पूर्व की ओर अभी भी अनिश्चिताओं से भरी म्यांमार की दीवार खड़ी  है | जहां सेना के शासन का बोलबाला रहा है और जब जाकर कोलाहलपूर्ण अनिच्छित लोकतंत्र की शुरुआत हुई है |

                    व्यापार की सुगमता धीरे –धीरे बेहतर हो रही है और त्रिपुरा जैसा छोटा राज्य इसमें अग्रणी है | जहाँ पर राज्य सरकार को इन्टरनेट का बहुत बड़ा और भारत को उसका तीसरा गेटवे मिला है | इसमें सहयोग का श्रेय बांग्लादेश की सरकार को जाता है |

       बांग्लादेश बगडोगरा में वाणिज्यिक दूतावास खोलने जा रहा है ताकि यात्रियों को दार्जिलिंग जैसी जगहों पर जाने के लिए कोलकाता के रास्ते घूमकर न जाना पड़े |

       इतना होने के बावजूद ऐसे कुछ कारक हैं जो कि पूर्व नीति के कार्यान्वयन ,अनुयोजकता के साथ उत्तर –पूर्व क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय निवेश की चुनौतियों को रेखांकित करते हैं  इन मुद्दों पर बड़ी चुनौतियों को ढ़कने वाली बातचीत और प्रसाधन विचार करने की बजाय इन मुद्दों का प्रत्यक्ष रूप से सामना करना महत्वपूर्ण  है |

        किसी भी क्षेत्र के लिए अशांत क्षेत्र की अपनी तस्वीर से पीछा छुड़ा पाना मुश्किल है | खासकर जिसका 60 वर्ष का आतंरिक और देश के साथ विद्रोह एवं विवादों का इतिहास रहा हो |ये उन कारणों में शामिल हैं जिसकी वजह से सरकार के जोरदार प्रचार के बावजूद क्षेत्र निवेशकों के लिए अनाकर्षक बना रहा |

         उद्यमी समूहों के लिए भूमि अधिग्रहण मुख्य कुंजी है | भूमि अधिग्रहण पारंपरिक ,राजनितिक और सामाजिक नेटवर्क का गोरखधंधा है |

       उत्तर –पूर्वी  क्षेत्र को भू स्थलीय बंधन मुक्त करने के लिए बंगाल की खाड़ी तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करना एक बड़ा कदम होगा | राष्ट्रीय बांस मिशन का अनुमान है की हर वर्ष तकरीवन 20 मिलियन टन बांस की फसल पैदा की जा सकेगी और इस क्षेत्र में लाखों लोगों को रोजगार मिल सकेगा ,लेकिन धरातल पर इसके लिए अविलम्बता का अभाव दिखाई देता है | यह क्षेत्र अनिवार्यता अभी भी उत्पादन केंद्र की बजाय बाजार बना हुआ है |

चुनौतियाँ :

  • मानव विकास के वर्तमान सूचकों के आंकड़े बताते हैं की भारत में सबसे ख़राब मृत्यु दर असम की है जो की 300 है ,यह उत्तर प्रदेश ,बिहार ,और मध्य प्रदेश से कहीं अधिक है जब कि यह 2005-2006 के रिकार्डेड 490 (प्रति एक लाख प्रसव पर ) से ऊपर होना एक उपलब्धि है |इस सुधार के बावजूद यह तथ्य बरक़रार है की पूर्व की ओर देखने की नीति हो या पच्शिम और दक्षिण की ओर,इससे मानव जीवन की आधारभूत गरिमा और समानता बेहतर नहीं होती | जो केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है |
  • वैश्विक मौसम में बदलाव से जलवायु प्रारूप में आये बदलाव एक अन्य महतवपूर्ण चुनौती है ,जिससे लोग देश के अन्य हिस्सों में स्थानांतरित हो रहें हैं |
  • ब्रह्मपुत्र घाटी हर वर्ष आने वाली बाढ़ से उजड. जाती है |

किया  गया  कार्य :

नदी के माध्यम से भारी मात्रा में सामान का आवागमन एक प्रशंसनीय कार्य है |ऐसे में जल परिवहन की नीति का होना जरूरी है |

प्रश्न यह उठता है कि?

 नदी के तट पर बसने वाले स्थानीय समुदाय कैसे लाभान्बित होंगे ? इतनी बढ़ी संख्या में जल;यानों के आवागमन से पारिस्थितिक तंत्र ,मछली ,और जंतु समूहों पर क्या प्रभाव पढ़ेगा? जो की आम आदमी के जीवन और जीवनयापन के लिए इतना महत्वपूर्ण हैं | जलीय जीवन ,क्षेत्र की स्थानीय मछली प्रजातियों ,जल पर निर्भर कृषि और मत्स्य समुदायों पर क्या –क्या प्रभाव पढेंगे ? दक्षिण एशिया की सबसे विलुप्ताप्राय मछली डॉलफिन का क्या होगा ,जिनकी संख्या मात्र 400 रह गयी है ?

  सुझाव:

  • क्षेत्र के प्रमुख सड़क और रेल नेटवर्क वर्ष में 3-5 महीने तक जल से बुरी तरह प्रभाभित होते हैं | वर्तमान और भविष्य की चिंता करने वाली आर्थिक नीति में मूलभूत कारक अवश्य सम्मिलित होने चाहिए |
  • दक्षिण –पूर्वी एशियाई विश्वविद्यालय ,मीडिया और हस्तकला संघठनो के साथ सहयोग ,संगीत का आदान –प्रदान ,प्रदर्शनों और उत्सवों से क्षेत्र के लोगों को एक – दुसरे के पास लाया जा सकता है |
  • ऐसे ट्रेक 2 की प्रक्रियायें जो ट्रेक 1 के अधिकारिक स्तर पर बातचीत को प्रभाबित कर सकें और हमे सूचित कर सकें ,इसके लिए सरकार ,अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और निकायों की आवश्यकता है |

culturalअंततःसजातीय समूहों और राज्य के विवादों को सुलझाने की चुनौती कई तरह से मक्हत्वपूर्ण होगी |व्यवसाय के अलावा विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए क्षेत्र को अधिक आकर्षक बनाना होगा |

    इस तरह के संकल्पों और समाधानों से इन क्षेत्रों की भारतीय युवा पीढ़ी की मह्त्वाकान्क्षाओं को बल मिलेगा |ऐसे भविष्य की ओर देखना जो शांति,सम्मान और न्याय पर आधारित हो | भौतिक आधारभूत ढाँचे के निर्माण ,व्यापार ,और विकास के अलावा जिससे की क्षेत्र के विकास का स्वस्थ सुद्रढ़ भविष्य सुनिश्चित हो |इसके लिए आतंरिक राजनितिक ,सामजिक और आर्थिक मतभेदों का समाधान करना होगा |

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