रिवालसर झील पर ग्रीन ट्रिब्यूनल का फैसला

अब बहुरेंगे रिवालसर झील के दिन 

  • rewalsar-lake-preset3झील की दुर्दशा के कारणों को जानने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के बाद अब सरकार ने भी एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। यह टीम भी जल्द ही एनजीटी को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
  •  प्रदेश सरकार ने सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी रिवालसर झील को बचाने के उपायों पर मास्टर प्लान तैयार करेगी। कमेटी मास्टर प्लान का खाका 12 मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपेगी।
  • रिवालसर झील की दुर्दशा को दैनिक जागरण द्वारा उजागर करने के बाद एनजीटी ने इस मामले में सरकार से जवाब तलब किया था। पांच सदस्यीय टीम ने रविवार को झील का दौरा किया था। इसके बाद हरकत में आई सरकार ने भी अनुराधा ठाकुर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है।
  • कमेटी के सदस्यों ने शनिवार को झील का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया था। झील के वर्तमान व पुराने स्वरूप को लेकर स्थानीय लोगों से चर्चा के बाद उनकी राय ली गई। लोगों से झील को बचाने के लिए उनके सुझाव भी लिए गए। कमेटी ने मछलियों को अत्याधिक मात्र में श्रद्धालुओं द्वारा डाले जाने वाली खाद्य सामग्री व कैचमेंट क्षेत्र की गंदगी झील के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना है।
  • ice_screenshot_20160503-143659इन दोनों बड़ी समस्याओं से कैसे पार पाया जाए, इसको लेकर कमेटी अब विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श कर रही है। झील का वजूद बचाए रखने के लिए कमेटी दीर्घकालीन योजना बनाने पर विचार कर रही है। इसमें कैचमेंट क्षेत्र का तटीकरण व डिसिलिं्टग की व्यवस्था करना प्रमुख रहेगी। डिसिलिंटग का प्रावधान होने से झील में जमी गाद की मात्रा कम होगी। इससे इसकी गहराई दोबारा बढ़ सकती है। झील के किनारों को दोबारा हरा-भरा बनाने के लिए सरकंडे लगाने की योजना बनाई गई है।

झील के बारे में 

रिवालसर हिमाचल प्रदेश के मंडी क़स्बे से 24 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से जुड़ा एक प्राचीन तीर्थ है जहाँ एक बड़ा सरोवर और सरोवर के निकट ही गुरु पद्मसम्भव द्वारा स्थापित ‘मानी-पानी’ नामक बौद्ध मठ और एक गुरुद्वारा भी स्थित है | यहाँ शंकर, लक्ष्मीनारायण और महर्षि लोमश के तीन मंदिर प्रसिद्ध हैं | रिवालसर सरोवर में सात उभरे हुए भूभाग हैं, उन पर उगे वृक्षों पर देव-मूर्तियाँ हैं| इस प्रकार यह स्थान हिंदू, बौद्ध एवं सिख धर्म के अनुयायियों के लिए श्रद्धा का केंद्र है।

One Comment

  1. Umesh
    May 05, 2016 at 5:02 am

    Vry nice….thnx

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