हिन्दुकुश पर्वत श्रृंखला का पारा चढ़ने से बाढ़ सूखे का खतरा

हिमालय के पश्चिम में फैली हिन्दुकुश  पर्वत श्रृंखला का तापमान वर्ष 2050 तक पांच डिग्री तक बढ़ जाएगा। कुछ स्थानों पर यह वृद्धि एक-दो डिग्री तो कुछ पर चार से पांच डिग्री होगी। इसके कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान से लेकर भारत तक कभी भारी वर्षा तो कभी सूखे की घटनाएं बढ़ सकती हैं। वल्र्ड माउंटेन डे (12 दिसंबर) के मौके पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का कहना है कि हालांकि अत्यधिक वर्षा का सिलसिला कम होता जा रहा है, लेकिन यह ज्यादा आक्रामक होगा और इसकी तीव्रता बढ़ जाएगी। तीन अंतरराष्ट्रीय संस्थानों इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट, नार्वे के ग्रिड एरेनडेल और सेंटर फॉर इंटरनेशनल क्लाइमेट एंड एन्वायरमेंट रिसर्च-ओस्लो (सिसेरो) द्वारा तैयार एटलस में यह चौंकाने वाली हकीकत बताई गई है।

इसे ‘मैपिंग एन अनसर्टेन फ्यूचर : एटलस ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड वाटर इन फाइव क्रूसियल वाटर बेसिन्स इन द हिन्दुकुश ’ नाम दिया गया है। यह पहला ऐसा एटलस है, जिसमें बदलती जलवायु और उसकी पांच नदी घाटियों-सिंधु, ब्रम्हपुत्र, गंगा, सालवीन और मेकांग के पानी के तापमान में वृद्धि के असर का व्यापक अध्ययन किया गया है। इसमें नक्शे और इंफोग्राफिक्स के माध्यम से बताया गया है कि कैसे क्षेत्र की जलवायु बदल रही है और उसे बचाने के क्या उपाय हो सकते हैं। हिमालय के पश्चिम में फैली हिन्दुकुश पर्वत श्रृंखला का तापमान वर्ष 2050 तक पांच डिग्री तक बढ़ जाएगा। कुछ स्थानों पर यह वृद्धि एक-दो डिग्री तो कुछ पर चार से पांच डिग्री होगी। इसके कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान से लेकर भारत तक कभी भारी वर्षा तो कभी सूखे की घटनाएं बढ़ सकती हैं। वल्र्ड माउंटेन डे (12 दिसंबर) के मौके पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का कहना है कि हालांकि अत्यधिक वर्षा का सिलसिला कम होता जा रहा है, लेकिन यह ज्यादा आक्रामक होगा और इसकी तीव्रता बढ़ जाएगी। तीन अंतरराष्ट्रीय संस्थानों इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट, नार्वे के ग्रिड एरेनडेल और सेंटर फॉर इंटरनेशनल क्लाइमेट एंड एन्वायरमेंट रिसर्च-ओस्लो (सिसेरो) द्वारा तैयार एटलस में यह चौंकाने वाली हकीकत बताई गई है। इसे ‘मैपिंग एन अनसर्टेन फ्यूचर : एटलस ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड वाटर इन फाइव क्रूसियल वाटर बेसिन्स इन द हिन्दुकुश’ नाम दिया गया है। यह पहला ऐसा एटलस है, जिसमें बदलती जलवायु और उसकी पांच नदी घाटियों-सिंधु, ब्रम्हपुत्र, गंगा, सालवीन और मेकांग के पानी के तापमान में वृद्धि के असर का व्यापक अध्ययन किया गया है। इसमें नक्शे और इंफोग्राफिक्स के माध्यम से बताया गया है कि कैसे क्षेत्र की जलवायु बदल रही है और उसे बचाने के क्या उपाय हो सकते हैं।

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