INTRODUCTION ABOUT CIVIL SERVICES

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संघ लोक सेवा आयोग

 

ऐतिहासिक पृष्टभूमि-भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रवादियों ने जो राजनीतिक आन्दोलन चलाया उसकी एक प्रमुख मांग थी की लोक सेवा आयोग में भर्ती भारत में हो ,क्योंकि तब इसकी परीक्षा इंग्लैंड में हुआ करती थी । प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना अक्तूबर 1926 को हुई।आज़ादी के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत 26 अक्तूबर 1950 को लोक आयोग की स्थापना हुई ।

इसे संवैधानिक दर्जा देने के साथ साथ स्वायत्ता भी प्रदान की गयी ताकि यह बिना किसी दबाव के योग्य अधिकारियों की भर्ती क़र सके।इस नव स्थापित लोक सेवा आयोग को संघ लोक सेवा आयोग नाम दिया गया ।

संवैधानिक प्रावधान-यह एक संवैधानिक संस्था है क्योकि इसकी स्थापना संविधान के अनुछेद 315 के अंतर्गत हुई है । सामान्यता आयोग में अध्यक्ष सहित 9 से 11 सदस्य होते है,संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवको की भर्ती के लिए मुख्य संस्था है जो केन्द्र एवं केन्द्र शासित प्रदेशो में विभिन्न प्रशासनिक परीक्षाओं का आयोजन करता है । आयोग विभिन्न सेवाओ के लिए लगभग दर्जन भर परीक्षाओ का आयोजन करता है , जैसे-

 

  • अभियांत्रिकी,चिकित्सा,वन सेवा आदि ।
  • भारतीय अभियांत्रिकी सेवा
  • भारतीय आर्थिक और सांख्यिकी सेवा
  • भूगर्भ सेवा
  • विशिष्ट श्रेणी रेलवे प्रशिक्षु सेवा
  • संयुक्त चिकित्सा सेवा
  • केंद्रीय पुलिस सेवा
  • संयुक्त रक्षा सेवा .
  • राष्टीय रक्षा सेवा

 

वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षाओ के माध्यम से 24 सेवाओ के लिए अभ्यर्थियों का चुनाव करता है इसमें से सबसे चर्चित भारतीय प्रशासिनिक भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय राजस्व सेवा है ।

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अखिल भारतीय सेवा

इस सेवा में चयन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा की जाती है, भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा एवं भारतीय वन सेवा तथा अखिल भारतीय सेवा के रूप में जानी जाती है । जबकि अन्य सेवाएं जैसे भारतीय राजस्व सेवा सुचना सेवा इत्यादि को केन्द्रीय सेवा कहा जाता है।

अखिल भारतीय सेवा की नियुक्तियां एवं प्रशिक्षण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है । यह संघ तथा राज्यों दोनों जगहों पर अपनी सेवायें देते हैं । नवनियुक्त अधिकारियों को काडर दिए जाते हैं, जिसके अननुसार वो विभिन्न राज्यों में अपनी सेवायें देते हैं ।

24 राज्यों के अपने काडर हैं परन्तु कुछ राज्यों के संयुक्त काडर हैं जैसे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असाम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, तथा केंद्र शासित राज्यों में आदि । भारतीय प्रशासनिक सेवा के सभी नागरिक सेवाओं भारतीय प्रशासनिक सेवा सर्वोच्च स्थान रखती है, लगभग 90 रिक्तियों में से प्रति वर्ष 55 से 60 लोगों को को ही (जो सफल घोषित किये जाते है) यह सेवा चाहे राज्य में हो या केंद्र में संपूर्ण प्रशासन की धुरी होती है ।

 

शुरआत में अनुमंडल और जिलो में अपनी सेवाएँ देने के बाद यह राज्यों सचिवालय,विभागीय (राज्यों में) सचिव की भूमिका निभाते है। केंद्र में इनकी प्रतिनियुक्ति भी होती है,जहाँ यह मत्रिमंडल सचिव (देश का वरिष्ट नौकरशाह ) के पद पर भी पहुचते है ।

 

जहाँ तक इनके कार्यो का सवाल है तो यह लिखित से ज्यादा अलिखित है,सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन, कानून प्रशासन, प्राक्रतिक आपदा में फंडो का वितरण, प्रशासनिक समेंव्य आदि अनेको कार्य एवं आई ए एस के द्वारा संपादित किये जाते है ।

 

 

 

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)

 

 

अखिल भारतीय सेवाओं में भारतीय प्रशासनिक सेवा (I.A.S.) सर्वोच्च स्थान रखती है । प्रत्येक वर्ष करीब एक हज़ार रिक्तियों में से वही अभ्यर्थी  I.A.S. के लिए चुने जाते हैं , जिनका रैंक 100 के नीचे रहता है। IAS अधिकारी सरकार (केन्द्र एवं राज्य) में महत्वपूर्ण ओहदों पर कार्य करते है। प्रारंभिक चरण में नियुक्ति के तुरंत बाद इन्हें अनुमंडल या जिलों में नियुक्त किया जाता है इसके बाद पदोन्नत (Promotion) होते होते ये राज्यों में विभागीय सचिव के पदों तक पहुंचते है ।

एक आई ए एस अधिकारी अपनी सम्पूर्ण सेवा अवधि का लगभग आधा समय राज्यों में बिताता है उसके बाद वह केंद्र में अपनी सेवाएँ देता है ।

राज्य में सर्वोच्च पद मुख्य सचिव का होता है जिस पर IAS की ही नियुक्ति होती हैं जबकि केंद्र में कैबिनेट सचिव का स्थान होता है । कैबिनेट सचिव सम्पूर्ण भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होता है ।

 

 

भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service)

यह सेवा उपरोक्त उल्लिखित तीन अखिल भारतीय सेवाओ में से एक है।इस सेवा का सृजन 1966 में देश की प्राक्रतिक वन संपदा के सवर्धन एवं संरक्षण हेतु किया गया, चयनित अभ्यार्थियो को अधारभूत प्रशासनिक प्रशिक्षण के लिए लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक संस्थान, मसूरी भेज जाता   है। इसके बाद इन्हें वन सेवा के अभिनव प्रशिक्षण के लिए इंदिरा गाँधी राष्टीय वन्य अकादमी संस्थान देहरादून भेज जाता है। अकादमिक प्रशिक्षण के बाद अभ्यार्थियो को फील्ड प्रशिक्षण के लिए राज्यों में (एक वर्ष के लिए) भेजा जाता है,भारतीय वन सेवा में चयनित अभ्यार्थियो की परिवीक्षाधीन अवधि तीन साल की होती है और इस अवधि में वो सहायक वन संरक्षण के पद पर कार्य करते है,इस समूची अवधि और चार वर्ष तक कनिष्ट पद पर कार्यरत रहने के बाद अधिकारियो को वरिष्ट पद और वेतनमान दिया जाता है।और वे सहायक वन संरक्षण अनुमंडल वन अधिकारी (D.F.O.) के पद पर कार्य करते है ।

भारतीय वन सेवा में रैंक इस प्रकार है_

  • परिवीक्षाधीन अधिकारी (Probationary Officer)
  • सहायक वन संरक्षण (Deputy Conservator of Forest)
  • वन संरक्षण (Conservator of Forest)
  • मुख्य वन संरक्षण (Chief Conservator of Forest)
  • अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षण (Additional Principal Conservator of Forest)
  • प्रधान मुख्य वन संरक्षण(PCCF)

नोट

यह पद किसी राज्य में वन सेवा अधिकारी का सर्वोच्च पद है । वन महानिदेशक (Director General of Forest), केंद्र में सर्वोच्च पद, इस पद पर राज्यों के वरिष्ट अधिकारियों में से एक को चुन जाता है ।

 

 

भारतीय राजस्व सेवा(Indian railway service)

भारतीय राजस्व सेवा,केंद्रीय सेवाओ में से एक है। यह सेवा (या इसके अधिकारी) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करते है।जो केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रहण के लिए ज़िम्मेदार होता है।भारतीय राजस्व सेवा की दो शाखाएँ  हैं —

 

सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क तथा आयकर (EXCISE DUTY, CUSTOM AND REVENUE DEPARTMENT इन दोनों शाखाओ पर दो वैधानिक संस्थाओं केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा  शुल्क (CBEC)तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष  कर बोर्ड (CBDT)द्वा रा नियंत्रण एवं निर्देशन किया जाता है!

भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी सहायक आयुक्त(ASSISTANT COMMISSIONER ) के पद से अपने सेवा की शुरुआत  करते है,एवं सामान्यतः वे मुख्य  आयुक्त (CHIEF COMMISSIONER)के पद तक पहुचतेहैं ।

 

इस सेवा के सबसे वरिष्ट सदस्य केंद्रीय प्रत्यक्ष कर (CBDT),केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड,सीमा उत्पाद एवं सेवा कर अपील न्यायाधिकरण एवं आयकर अपील  न्यायाधिकरण के प्रमुख के पद पर पुहंचते है।आई आर एस(INDIAN   REVENभारतीय राजस्व सेवा,केंद्रीय सेवाओ में से एक है।यह सेवा(या इसके अधिकारी)

वित्त मंत्रालय के राजस्व  विभाग के अधीन कार्य करते है।जो केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष  और अप्रत्यक्ष कर संग्रहण के लिए ज़िम्मेदार होता है।UE SERVICE) अधिकारियों को राष्ट्रीय  प्रत्यक्ष कर बोर्ड अकादमी,नागपुर में प्रशिक्षण दिया जाता है ।

 

 

भारतीय पुलिस सर्विस (IPS)

 

 

भारतीय पुलिस सेवा आई पी एस (I P S) तीन अखिल भारतीय सेवाओ में से एक है,नियुक्ति के बाद इन्हें राज्य या काडर दिए जाते है,जहाँ ज़िला पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में इन्हें दो वर्ष की ट्रेनिंग दी जाती है,इस के बाद उन्हें सहायक पुलिस अधीक्षक (A.S.P)के रूप में तीन स्टार का बैच प्रदान किया जाता है,इसके बाद की पदोन्नति इस प्रकार है-

 

  • पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police – S.P.)
  • वरिष्ट पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police – S.S.P)
  • उप महानिरीक्षक (Deputy Inspector General – D.I.G)
  • महानिरीक्षक (Inspector General – I.G)
  • पुलिस महानिदेशक (Director General of Police – D.G.P) (यह राज्य के पुलिस बल का मुखिया होता है)

 

कई महानगरों जैसे दिल्ली ,बंगलौर, मुंबई आदि में कानून व्यवस्था की पूर्ण ज़िम्मेदारी पुलिस बल की होती है।

इन महानगरों में सहायक पुलिस अधीक्षक (A.S.P) पुलिस अधीक्षक ( S.P), उप महानिरीक्षक (D.I.G) को सहायक पुलिस आयुक्त (ACPO) उप पुलिस आयुक्त (D.C.P) एवं पुलिस आयुक्त (CP) कहा जाता है।
समय के साथ साथ भारतीय सेवा के उद्देशों और कार्य पद्धति में काफी परिवर्तन आया है ।

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी ख़ुफ़िया ब्यूरो (I.B) अनुसंधान एव विशलेषण संस्थान (R.A.W) केंद्रीय जाँच ब्यूरो (C.B.I), अपराध अनुसंधान विभाग (C.I.D) में भी अपनी सेवाएँ देते है,और इसके प्रमुख पदों पर I.P.S अधिकारियों को ही नियुक्त किया जाता है ।

भारतीय विदेश सेवा (IFS)

भारतीय विदेश मन्त्रालय के कार्य को चलाने के लिए एक विशेष सेवा वर्ग का निर्माण किया गया है जिसे भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Service I.F.S.) कहते हैं। यह भारत के पेशेवर राजनयिकों का एक निकाय है। यह सेवा भारत सरकार  की केंद्रीय सेवाओं का हिस्सा है। भारत के विदेश सचिव भारतीय विदेश सेवा के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं। 1948 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के तहत नियुक्त भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के पहले समूह ने सेवा में योगदान दिया. इस परीक्षा को आज भी नए आईएफएस अधिकारियों के चयन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

सिविल सेवा परीक्षा का प्रयोग कई भारतीय प्रशासनिक निकायों की भर्ती के लिए किया जाता है। इसके तीन चरण हैं – एक प्रारंभिक परीक्षा, एक मुख्य परीक्षा और एक साक्षात्कार – और इसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

संपूर्ण चयन प्रक्रिया लगभग 12 महीनों तक चलती है। लगभग 400,000 प्रतिभागियों में से प्रति वर्ष लगभग 800 से 900 उम्मीदवारों का चयन अंतिम रूप से किया जाता है, लेकिन केवल एक अच्छी रैंक ही आईएफएस में चयन की गारंटी देती है – जिसकी स्वीकृति दर 0.01 फीसदी है।

हाल के वर्षों में भारतीय विदेश सेवा में प्रति वर्ष औसतन लगभग 20 व्यक्तियों को शामिल किया जाता है। सेवा की वर्तमान कैडर संख्या लगभग 600 अधिकारियों की है जिसमें लगभग 162 अधिकारी विदेशों में भारतीय मिशन एवं पदों पर और देश में विदेशी मामलों के मंत्रालय में विभिन्न पदों पर आसीन हैं ।

भारतीय रेलवे सेवा (Indian Rail Service)

भारतीय रेल जो एशिया की सबसे बड़ी और विश्व की दूसरी सबसे विशाल नेटवर्क है, को इस देश की जीवन रेखा कहा जाता है, यह न केवल यात्रियों को अपने गंतव्य (Destination) तक पहुंचाती है, वरन सस्ती माल ढुलाई से देश की आर्थिक वृद्धि में भी अहम योगदान देती है । अपनी स्थापना के काल से ही भारतीय रेल राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का कार्य कर रही है ।

इस सेवा (Service) में ग्रुप ए (A) के पदों पर नियुक्त संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से होती है.हालाँकि Special Class of Railway Apprentices’ (SCRA) के द्वारा भी इसमें उच्च पदों पर नियुक्ति होती है, लेकिन उन्हें ग्रुप (B) से अपनी सेवा की शुरुआत करनी होती है। यूपीएससी (UPSC) अभियांत्रकी (Engineering) सेवा के माध्यम से भी रेलवे में भर्ती करती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा

  • भारतीय रेलवे यातायात सेवा Indian Railway Traffic Service (IRTS)  – समूह ए
  • भारतीय रेलवे लेखा सेवा Indian Railway Accounts Service (IRAS) – समूह ए
  • भारतीय रेलवे वैयक्तिक सेवा Indian Railway Personnel Service (IRPS) – समूह ए
  • रेलवे सुरक्षा बल Railway Protection Force (IRPC) – समूह ए

UPSC अभियांत्रिकी सेवा  परीक्षा

  • भारतीय रेलवे संकेतक सेवा Indian Railway Service of Signal Engineering (IRSSE) – समूह  
  • भारतीय रेलवे अभियांत्रकी सेवा Indian Railway Service Of Engineering (IRSE) – समूह ए
  • भारतीय रेलवे भंडार सेवा Indian Railway Store Service (IRSS) – समूह ए
  • भारतीय रेलवे यांत्रिकी सेवा Indian Railway of Mechanical Service (IRMS) – समूह ए
  • भारतीय रेलवे इलेक्ट्रिकल सेवा Indian Railway Electrical Service (IRES) – समूह ए

 

सिविल सेवा परीक्षा (What is Civil Service)

 

संघ लोक सेवा आयोग हर साल सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करता है । यह परीक्षा तीन चरणों में होता है । पहला चरण प्रारम्भिक परीक्षा, दूसरा चरण मुख्य परीक्षा और तीसरा एवं अंतिम चरण साक्षात्कार का होता है । साक्षात्कार में अंतिम रूप से चयनित छात्र अपने अंक और वरीयता के हिसाब से आई.ए.एस., आई.पी.एस., आई. एफ.एस तथा अन्य केन्द्रीय सेवाओं(ए और बी ग्रुप ) के लिए चुने जाते हैं । यह परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है । इस परीक्षा में सफलता के लिए कड़ी मेहनत के साथ पर्याप्त धैर्य की आवश्यकता होती है ।

परीक्षा की प्रकृति (Nature of exam)

किसी भी परीक्षा की तैयारी करने से पूर्व उसकी प्रकृति को समझना आवश्यक है, क्योकि यह उन्हें परीक्षा प्रक्रिया, संरचना, एव उसके अन्य पहलूओ के बारे में अभ्यर्थी को एक स्पष्ट समझ प्रदान करता है! जहाँ तक संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित आई, ए , एस परीक्षा का प्रश्न है तो इसकी गहराई, विषयों की विविधता और इस परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों (candidate) की बड़ी तादात को देखते हुए यह आवश्यक है की इसकी पूरी जानकारी अभ्यर्थियों को हो।

विगत दो वर्षो से संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा की इस अधिसूचना फ़रवरी माह में प्रकाशित करता है, इसे आयोग की अधिकारिक वेबसाइट www.upsc.gov.in   पर डाउनलोड किया जा सकता है।

हर अभ्यर्थी जो सिविल सेवाओं की तैयारी करता है उसका सपना होता है की वो एक IAS अधिकारी बने. यूँ तो वैश्वीकरण के बाद (1991 के बाद) देश में निजी क्षेत्रों   में रोज़गार के अनेकों अवसर पैदा हुए है जहाँ वेतन भी अच्छी खासी है लेकिन इस सेवा का आकर्षण अभी भी बरक़रार है., हर वर्ष इस सेवा में भाग लेने वाले अभ्यर्थियो की संख्या में निरंतन बढ़ोतरी हो रही है लेकिन रिक्तियां उस हिसाब से नही बढ़ रही है, ज़ाहिर सी बात है की यह परीक्षा उस भवसागर के समान है जिसे पार करने के लिए उम्मीदवारों को कड़ी मेहनत, सही रणनीति, लगन तथा समर्पण की ज़रूरत होती है.

परीक्षा में भाग लेने के दो वर्ष पूर्व से इसकी तैयारी अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त है.

सबसे महत्वपूर्ण बात अभ्यर्थियो को खुद का यथार्थवादी आकलन करके ही इस परीक्षा में सम्मिलित होने के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि यहाँ सब कुछ हरा हरा ही नही है, बल्कि तपता रेगिस्तान भी है

जिसकी गर्मी से अभ्यर्थी बीच में ही रास्ता छोड़ सकते है, इसलिए अगर आपने IAS बनने का रास्ता चुन लिया है तो पूरी लगन से मंजिल की तरफ बढिए विफलता से घबराकर पीछे मुड़कर मत देखिये क्युकी विफलता ही सफलता के रास्ते खोलती है! एक और कड़वा सच यह है कि आई ए एस बनने का सपना सँजोना अच्छी बात है लेकिन व्यवाहरिकता यह कहती है कि आप भविष्य की सुरक्षा के लिए नौकरी का एक विकल्प खुला रखें

 

 

शैक्षणिक योग्यता (Academic Eligibility)

सिविल सेवा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए संघ लोक सेवा आयोग (U.P.S.C) द्वारा निम्नलिखित अर्हरता निर्धारित की गयी हैं-

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (U.G.C) की धारा 1956, द्वारा मान्यता प्राप्त, किसी राज्य अथवा केंद्रीय विश्वविद्यालय, या ड्रीम्ड विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक अथवा समकक्ष की डिग्री ।

वैसे छात्र जो स्नातक अथवा समकक्ष परीक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं या अंतिम वर्ष में हैं, वो प्रारंभिक परीक्षा में बैठ सकते है । लेकिन मुख्य परीक्षा में शामिल होने के पूर्व उन्हें आवेदन पत्र के साथ
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की डिग्री संलग्न करना आवश्यक है ।

विशेष परिस्थिति में आयोग (U.P.S.C) वैसे छात्रों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकता है जो निर्धारित योग्यता धारण नहीं करते हैं लेकिन आयोग की नजर में उनकी डिग्री न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के समकक्ष है ।

पेशेवर और तकनीकी योग्यता वाले छात्र भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं ।

वैसे अभ्यर्थी जो M.B.B.S के Final में हैं या जिनकी इंटर्नशिप अभी पूरी नहीं हुई है वो भी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकते हैं । लेकिन साक्षात्कार के दौरान उन्हें पूरी डिग्री साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष रखनी पड़ती है ।

 

 

योग्यता की अन्य शर्ते (Other Eligibility Conditions)

 

राष्ट्रीयता

सिविल सेवा परीक्षा में I.A.S. एवं I.P.S. के पद केवल भारतीय नागरिकों के लिए होते हैं । अन्य पदों, सेवाओं के लिए निम्नलिखित में से कोई एक योग्यताएँ होनी चाहिए ।

  • भारतीय नागरिक हो
  • नेपाली नागरिक हो
  • भूटान का नागरिक हो

वैसे तिब्बती षरणार्थी जो 1 जनवरी 1962 से पूर्व भारत आए हो और भारतीय नागरिकता ली हो।

भारतीय मूल के वैसे नागरिक जो बर्मा, इथियोपिया, कीनीया, मलावी, पाकिस्तान, श्रीलंका, युगांडा, तंजानिया, वियतनाम, जायरे और जांबिया से इस उद्देष्य से प्रवसित होकर आए हों कि उन्हें स्थायी रूप से भारत में निवास करना है ।

श्रेणी से इए b, c, d, एवं e संबद्ध अभ्यर्थीयों को भारत सरकार द्वारा योग्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है।

जो अभ्यर्थी श्रेणी b, c, या d से संबद्ध हैं वो भारतीय विदेश सेवा (I.F.S.) में नहीं चुने जाएँगे ।

 

 

प्रारंभिक  परीक्षा (Preliminary Examination)

सिवील सेवा परीक्षा तीन चरणों में संपन्न होती है । प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार

प्रारंभिक परीक्षा- यह त्रि-स्तरीय सिविल सेवा परीक्षा का पहला एवं सबसे महत्वपूर्ण चरण है । प्रत्येक वर्श लगभग चार लाख अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में षामिल होते हैं लेकिन इनमें से केवल
13-14 हजार ही मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई कर पाते हैं

 

प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिश्ठ होती है, जिसमें दो पत्र होते है-

                               पत्र प्रश्नो की संख्या अंक अवधि
                        प्रथम पत्र 100 200 दो घंटे
                        द्वितीय पत्र 80 200 दो घंटे
  180 400  
  • प्रथम पत्र सामान्य अध्ययन का होता है, जिसमे इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, विज्ञान, सामयिक घटनाओं से संबंधित प्रष्न पूछे जाते है । प्रत्येक प्रष्न के लिए दो अंक निर्धारित हैं । प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/3 अंक काटे जाते हैं । (कुल अंक में से)
  • द्वितीय पत्रःतार्किक क्षमता एवं योग्यता है । इस पत्र में प्रष्न संख्या 73-80 को छोड़कर सभी प्रष्नों के लिए नकारात्मक अंक की व्यवस्था है । यहाँ उल्लेखनीय है कि जो अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल होते हैं उनके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाते

 

मुख्य परीक्षा (Main Exam)

सिविल सेवा परीक्षा के इस द्वितीय एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण में अभ्यर्थियों के ज्ञान की वास्तविक परीक्षा होती है । इसमें कुल 9 प्रश्न पत्र होते हैं । वर्ष 2013 में संघ लोक सेवा आयोग (U.P.S.C) ने मुख्य परीक्षा के ढांचे में आमूल चूल परिवर्तन किया । अब सामान्य अध्ययन पूर्व के 600 अंक की बजाय 1000 अंक का हो गया है। वैकल्पिक विषय पूर्व में दो थे (कुल 1200 अंक) अब सिर्फ एक वैकल्पिक विषय अभ्यर्थियों द्वारा चुना जाना है । जो कुल 500 अंकों का होगा ।

पत्र विषय नाम अंक
1 निबंध 250
2 सामान्य अध्ययन-1, (भारतीय विरासत एवं संस्कृति, भूगोल, अन्य) 250
3 सामान्य अध्ययन-2-1 शासन, संविधान, सामाजिक न्याय, अन्य 250
4 सामान्य अध्ययन-3- प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-प्रौद्योगिकी, अन्य 250
5 सामान्य अध्ययन-4- नैतिकता, अभिरूचि, योग्यता 250
6 वैकल्पिक विषय- पत्र – 1 250
7 वैकल्पिक विषय- पत्र – 2 1750

उल्लेखनीय है कि मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को आयोग द्वारा परीक्षा के अंतिम चरण यानि साक्षात्कार में बुलाया जाता है

 

 

साक्षात्कार (Interview)

साक्षात्कार सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम चरण होता है । इसमें अभ्यर्थियों के बायो डाटा, उनके एच्छिक विशय, अभिरूचियों सामयिक राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय घटनाओं से संबंधित प्रश्न पूछा जाता है ।
30-35 मिनट तक चले साक्षात्कार को काफी अच्छा माना जाता है । संघ लोक सेवा आयोग ने 2013 से मुख्य परीक्षा की पद्धति एवं सिलेबस के साथ-साथ साक्षात्कार के अंकों में भी बदलाव किया है । पहले साक्षात्कार 300 अंकों का होता था । अब इसे घटाकर 225 अंकों का कर दिया गया है ।

यहाँ उल्लेखनीय है कि साक्षात्कार में आपके ज्ञान से ज्यादा, उसकी प्रस्तुति, आपके आत्मविश्वास एवं महत्वपूर्ण मामलो पर आपके विचारों की परख होती है । परिस्थितिजन्य प्रश्नों का विश्वासपूर्वक उत्तर इस चरण में आपकी सफलता को और पुख्ता करता है ।

 

 

प्रशिक्षण (Training)

 

वर्तमान में सिविल सेवा में चयनित अभ्यर्थियों को वैयकिक्त एवं प्रशिक्षण विभाग से सलाह (Consultation) के बाद विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाता है,प्रत्येक वर्ष जो अभ्यर्थी सफल होते है,संपूर्ण प्रशिक्षण के दौरान उन्हें परीविक्षक(IAS, IPS, IFS ETC) कहा जाता है.

सर्वप्रथम सारे अभ्यर्थियों को चार महीने का आधारभूत प्रशिक्षण (BASIC TRAINING) लाल बहादुर शास्त्री अकादमी(मसूरी)में दिया जाता है।इस प्रशिक्षण के बाद I A S अभ्यर्थियो को छोड़कर सारे प्रशिक्षु भिन्न -भिन्न संस्थानों में आगे के प्रशिक्षण के लिए जाते हैं।

भारतीय विदेश सेवा में ( IFS) में चयनित परीविक्षकों को दिल्ली में,भारतीय पुलिस सेवा (I P S ) को सरदार वल्लभ भाई पटेल अकादमी हैदराबाद,भारतीय राजस्व सेवा ( I R S) को राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अकादमी (National Academy Of Direct Taxes, NADT ) नागपुर ( IT ) एवं सीमा शुल्क ,उत्पाद एवं नारकोटिक्स (National Academy of Customs, Exercise & Narcotics) IRSC &CE) को फरीदाबाद में प्रशिक्षण दिया जाता है.

इस संपूर्ण प्रशिक्षण के बाद I A S एवं I P S (अखिल भारतीय सेवा ) को राज्यों ( जो काडर उन्हें दिए जाते है) में एवं अन्य सेवा जैसे I R S , I R T S आदि को विभिन्न स्थानों पर नियुक्त दी जाती है।

 

 

 

 

 

One Comment

  1. Rajesh
    May 21, 2016 at 3:42 am

    I want some notes on current affairs for IAS

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