मुद्दा -“केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड : सेंसर बोर्ड में सुधार की पहल”

प्रश्न : आधुनिकीकरण के युग में केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्मो को सेंसरशिप के विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकरण करना क्या आधुनिक समाज एवं आधुनिक शिक्षा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करने जैसा है ?क्या सही मायने में सेंसर बोर्ड ने अपनी महती भूमिका का निर्वहन किया है ? क्या बोर्ड ने वास्तविक मूल्यों को प्राप्त कर […]

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मुद्दा :-शिक्षा -उत्पादन एवं विज्ञान पर जनसंख्या वृद्धि के कारण पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों की समीक्षा

विषय : शिक्षा स्वास्थ्य और विकास एवं जनसंख्या वृद्धि के मध्य विरोधाभास भारत की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है किसी एक परिवार को देखकर जनसंख्या बढ़ने का पता नहीं लगता क्योंकि परिवार में सदस्यों की संख्या संख्या यदि 4 से 6 हो जाती है तो किसी न किसी तरह घर के बड़े सदस्य […]

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ग्रामीण क्षेत्रों का बहुआयामी विकास:प्रयास और उपलब्‍धि

ग्रामीण क्षेत्रों का बहुआयामी विकास:प्रयास और उपलब्‍धि ग्रामीण विकास विभाग स्‍व-रोजगार एवं मजदूरी रोजगार के सृजन, ग्रामीण निर्धनों के लिए आवास एवं सिंचाई परिसम्‍पत्ति के प्रावधान, निराश्रितों को सामाजिक सहायता एवं ग्रामीण सड़कों हेतु स्‍कीमों का कार्यान्‍वयन करता है। इसके अतिरिक्‍त, विभाग डीआरडीए प्रशासन को सुदृढ़ करने हेतु सहायता, पंचायती राज संस्‍थान, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान, […]

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नाटी लोक नृत्य : गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के नाटी लोक नृत्य को वर्ष 2016 के जनवरी माह में गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिया गया. कुल्लू दशहरा महोत्सव के दौरान 26 अक्तूबर 2015 को प्राइड ऑफ कुल्लू के अंतर्गत बेटी बचाओ थीम पर एक साथ 9892 महिलाओं ने भाग लिया था.इस आधार पर इस लोक नृत्य […]

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कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिब्लिटी : सीएसआर

कंपनियों का सामाजिक दायित्व, जिसे अंग्रेजी में कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिब्लिटी कहते हैं, केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आता है। इस सम्बन्ध में नियम-कानून वही बनाता है। राज्य सरकारें उन नियमो के तहत अपने राज्य के लोगो के सामजिक लाभ के लिए इन कंपनियों से खर्च कराती हैं। सीएसआर के नियम को […]

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संथारा एवं भारतीय समाज

जैनियों के संथारा प्रथा : राजस्थान उच्च न्यायालय का फैसला और उसका प्रभाव जैन धर्म की प्राचीन धार्मिक प्रथा संथारा, जिसमें मृत्यु तक स्वैच्छिक उपवास किया जाता है, शरीर को समाप्त कर मुक्ति प्राप्त करने  की एक रस्म है. यह सर्वोच्च त्याग और महान धर्मपरायणता का कार्य है. 10 अगस्त 2015 को राजस्थान उच्च न्यायलय […]

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