GIST OF PIB (1 APRIL -7 APRIL) साप्ताहिक सारांश

1 ) उमा भारती ने जल फिल्म समारोह का उद्घाटन किया 

1केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने आज नई दिल्ली में वाटर एक्सपो-2016 में जल फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सुश्री भारती ने कहा कि देश की तरक्की और समृद्धि के लिए जल संसाधन महत्वपूर्ण है और फिल्मों के जरिए कारगार तरीके से जल संरक्षण का संदेश दिया जा सकता है। सुश्री भारती ने कहा कि लोगों के हित के लिए ऐसी फिल्में देश के कोन-कोने में दिखाई जानी चाहिए।

फिल्म समारोह जल सप्ताह 2016 समारोह के हिस्से के रूप में जल संसाधन नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक प्रतिष्ठान जल तथा विद्युत सलाहकार सेवा (वैपकॉस) लिमिटेड द्वारा किया गया।

2) ऊर्जा सक्षम बल्‍बों के बाद सरकार ने किसानों के लिए स्‍मार्ट पम्‍प और लोगों को ऊर्जा सक्षम पंखे देने का राष्‍ट्रीय कार्यक्रम लांच किया 

  • विजयवाड़ा राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम पंखा कार्यक्रम लागू करने वाला देश का पहला शहर होगा।
  • ईईएसएल आंध्र प्रदेश में किसानों को नि:शुल्‍क स्‍मार्ट सिम वाले दो लाख कृषि पम्‍प सेट बांटेगा।
  • देश को ऊर्जा सक्षम बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ते हुए आज केन्‍द्र सरकार ने राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प कार्यक्रम तथा राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम पंखा कार्यक्रम आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में लांच किया।
  • कार्यक्रम आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री एन चन्‍द्रबाबू नायडू द्वारा ऊर्जा सक्षम बिजली पर दो दिन की अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के दौरान लांच किया गया।
  • दोनों योजनाएं विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्‍ठानों के संयुक्‍त उद्यम एनर्जी इफिसिएन्‍ट सर्विसेज  लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा लागू की जाएंगी।
  • राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प कार्यक्रम के अंतर्गत किसान नि:शुल्‍क अपने अक्षम और बेकर पम्‍पों को बीईई स्‍टार रेटिंग वाले ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प सेटों से बदल सकते हैं। इन पम्‍पों में स्‍मार्ट कंट्रोल पैनल होगा और एक सिम कार्ड होगा।
  • किसान अपने मोबाइल फोन से रिमोर्ट कंट्रोल रूप में पम्‍प को चालू और बंद कर सकते हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत ईईएसएल 200,000 बीईई स्‍टार रेटिंग वाले पम्‍प सेट किसानों को वितरित करेगी।
  • इससे 2019 तक 30 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होगी और इसका परिणाम यह होगा कि कृषि सब्सिडी में अनुमानत: 20 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी और प्रत्‍येक वर्ष 50 बिलियन यूनिट बिजली की बचत होगी।  

राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प कार्यक्रम की विशेषताएं

  • बीईई स्‍टार रेटिंग वाले ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प सेट किसानों को नि:शुल्‍क बांटे जाएंगे।
  • इन पम्‍पों में स्‍मार्ट कंट्रोल पैनल होगा और एक सिम कार्ड और स्‍मार्ट मीटर होगा।
  • किसान अपने मोबाइल फोन से रिमोर्ट कंट्रोल रूप में पम्‍प को चालू और बंद कर सकते हैं।
  • स्‍मार्ट मीटर से रियल टाइम आधार पर किसान इस्‍तेमाल की जा रही बिजली की निगरानी कर सकते हैं।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत ईईएसएल 200,000 बीईई स्‍टार रेटिंग वाले पम्‍प सेट किसानों को वितरित करेगी। इससे 2019 तक 30 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होगी। परिणाम स्‍वरूप कृषि सब्सिडी पर अनुमानत: 20 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी और प्रत्‍येक वर्ष 50 बिलियन यूनिट बिजली की बचत होगी।  

3) राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम पंखा कार्यक्रम

  • इसके अंतर्गत 50 वाट के बीईई पांच स्‍टार रेटिंग वाले छत के पंखे बांटे जाएंगे।
  • इससे बिजली बिल में प्रति वर्ष 700 से 730 रुपये की कमी आएगी। इसलिए इन पंखों की लागत उगाही में दो वर्ष से कम का समय लगेगा।
  • ये पंखे परम्‍परागत 75-80 वाट वाले पंखों से 30 प्रतिशत अधिक ऊर्जा बचाएंगे। अभी प्रत्‍येक उपभोक्‍ता को दो ऊर्जा सक्षम पंखे 60 रुपये ईएमआई आधार पर दिए जाएंगे।
  • ईएमआई की राशि को दो वर्षों के लिए उपभोक्‍ता के बिजली बिल में जोड़ा जाएगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए उपभोक्‍ता को अब अपना नया बिजली बिल और आवासीय प्रमाण की प्रति के साथ वितरण केन्‍द्र पर जाना होगा।
  • उपभोक्‍ता 1250 रुपये का नकद भुगतान करके भी पंखा खरीद सकते हैं।  

राष्‍ट्रीय ऊर्जा सक्षम पंखा कार्यक्रम की विशेषताएं

  • ऊर्जा सक्षम, 50 वाट तथा पांच स्‍टार रेटिंग के छत के पंखे
  • ये पंखे परम्‍परागत 75-80 वाट वाले पंखों से 30 प्रतिशत अधिक ऊर्जा बचाएंगे।
  • अभी प्रत्‍येक उपभोक्‍ता को दो ऊर्जा सक्षम पंखे 60 रुपये ईएमआई आधार पर दिए जाएंगे।
  • इस योजना का लाभ उठाने के लिए उपभोक्‍ता को अब अपना नया बिजली बिल और आवासीय प्रमाण की प्रति के साथ वितरण केन्‍द्र पर जाना होगा।
  • इससे बिजली बिल में प्रति वर्ष 700 से 730 रुपये की कमी आएगी। इन पंखों की लागत उगाही में दो वर्ष से कम का समय लगेगा।

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री चन्‍द्रबाबू नायडू ने लोगों से कहा कि वे ऊर्जा बचाने की अपनी जिम्‍मेदारी को महसूस करें। देश बड़ी ऊर्जा चुनौती का सामना कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि आंध्र प्रदेश ऊर्जा बचाने के लिए नये-नये विचारों के साथ आगे बढ़ रहा है। श्री नायडू ने कहा कि पिछले वर्ष विशाखापत्‍तनम में हुदहुद तूफान आने के बाद सरकार ने वहां के सभी बल्‍बों को एलईडी बल्‍ब में बदल दिया और इस तरह 21000 मेगावाट बिजली बचाई गई और राज्‍य के खजाने में भी बचत हुई।

      उन्‍होंने कहा कि बिजली बोर्ड के कामकाज में सुधार लाने के वह अग्रदूत रहे हैं। श्री नायडू ने कहा कि “आंध्र प्रदेश उजाला योजना” के अंतर्गत 1.8 करोड़ एलईडी बल्‍ब लगाने वाला देश का पहला राज्‍य है। इससे राज्‍य सरकार को रोजाना 2.6 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलती है। आंध्र प्रदेश ऊर्जा सक्षम कार्यक्रमों को अपनाने में हमेशा आगे रहा है। उजाला की सफलता में योगदान के लिए हम अब ऊर्जा सक्षम पंखा कार्यक्रम और ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प कार्यक्रम लागू करेंगे। इससे हमारी पीक अवधि की मांग के प्रबंधन में मदद मिलेगी और राज्‍य ऊर्जा सक्षम बनेगा।’

    इससे पहले श्री चन्‍द्रबाबू नायडू ने रिमोर्ट कंट्रोल के जरिए ऊर्जा सक्षम पंखे का अनावरण किया और विजयवाड़ा से 150 किलोमीटर दूर राजामुंदरी में लगाए गए ऊर्जा सक्षम कृषि पम्‍प को बटन दबाकर चालू किया। श्री नायडू ने समारोह में उपभोक्‍ताओं को एलईडी बल्‍ब और पंखे भी दिए।

4) करदाताओं के ई-फाइलिंग अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए नई सुविधा शुरू

  • आयकर विभाग फि‍शिंग ईमेल से बचने की जरूरत और पासवर्ड एवं ओटीपी की सावधानीपूर्वक रक्षा करने और दूसरों के साथ उन्‍हें साझा नहीं करने के बारे में समय-समय पर परामर्श जारी करता रहा है। 
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि करदाता धोखाधड़ी के किसी भी प्रयास के खिलाफ अपने ई-फाइलिंग अकाउंट को सुरक्षित रखने में समर्थ साबित हों, आयकर विभाग ने ‘ई-फाइलिंग वॉल्ट’ नामक एक नई सुविधा शुरू की है।
  • इस सुविधा का उपयोग करने के लिए करदाता अपने ई-फाइलिंग एकाउंट को लॉग-इन कर सकते हैं और अपने प्रोफाइल पेज के तहत ‘ई-फाइलिंग वॉल्ट- अधि‍क सुरक्षा’ का चयन कर सकते हैं। 
  • करदाता इसके बाद अधि‍क सुरक्षा वाले तरीकों के किसी एक या कई विकल्पों के तहत लॉग-इन करने का चयन कर सकते हैं।
  • विभि‍न्‍न विकल्‍प ये हैं – ओटीपी सृजित करने के लिए आधार लिंकेज का उपयोग करना, नेट-बैंकिंग के जरिए लॉग-इन और डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) का उपयोग करके लॉग-इन।
  • ऐसा एक बार पूरा हो जाने के बाद लॉग-इन करने संबंधी किसी भी भावी प्रयास के तहत या तो ‘आधार’ के उपयोग के जरिए ओटीपी की अतिरिक्त जांच की आवश्यकता होगी अथवा करदाताओं को नेट बैंकिंग के उपयोग के जरिए या डीएससी के उपयोग के जरिए लॉग-इन करना होगा।
  • इस सुविधा का उपयोग करके करदाता किसी को भी लॉग-इन करने से रोक सकता है, भले ही अतीत में उसने यूजर आईडी और पासवर्ड को साझा क्‍यों न किया हो। सिंगल यूजर आईडी और पासवर्ड की तुलना में यह दोहरा कारक अनुमोदन कहीं ज्‍यादा सुरक्षा सुनिश्चित करता है। 
  • इसी तरह, करदाता यह भी चयन कर सकता है कि कैसे अपने पासवर्ड को रीसेट किया जा सकता है। करदाता जब भी अधि‍क सुरक्षा वाले तरीकों के किसी एक या कई विकल्पों का उपयोग करके रीसेट पासवर्ड का चयन कर लेगा, तो कोई भी अन्य व्यक्ति करदाता के पासवर्ड को रीसेट करने में सक्षम नहीं हो पाएगा, भले ही गोपनीय उत्‍तर अथवा ई-फाइलिंग ओटीपी इत्‍यादि क्‍यों न उसे ज्ञात हो।
  • इस मामले में विभि‍न्‍न विकल्‍प ये हैं – ओटीपी सृजित करने के लिए आधार लिंकेज का उपयोग करना, नेट-बैंकिंग के जरिए लॉग-इन और डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) का उपयोग करके लॉग-इन। 

5) पर्यावरण मंत्रालय ने खतरनाक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 अधिसूचित किया

  • पहली बार, खतरनाक कचरे और अन्य कचरों में अंतर करने के लिए नियम बने हैं।
  • दूसरे कचरों में पुराने खराब हो चुके टायर, धातुओं की रद्दी, इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक चीजें शामिल हैं। इन्हें रीसाइकिलिंग और री-यूज संसाधन माना जाता है।
  • ये संसाधन औद्योगिक प्रक्रिया के पूरक होते हैं और देश के शुद्ध संसाधनों पर कम बोझ डालते हैं।

खतरनाक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 की विशेषताएं

  1. अन्य कचरों को इसमें शामिल करने के लिए नियमों का दायरा बढ़ाया गया है।
  2. कचरा प्रबंधन शीर्षक्रमानुसार इस तरह रखा गया है- रोकथाम, कचरा का न्यूनतम उत्पाद, दोबारा इस्तेमाल, रीसाइकिलिंग, रिकवरी, सह- प्रोसेसिंग और सुरक्षित निपटान।
  3. अनुमति/निर्यात, वार्षिक रिटर्न दाखिल करने, ट्रांसपोर्टेशन आदि से जुड़े सभी फॉर्म्स संशोधित कर दिए गए हैं। इससे यह साफ है कि खतरनाक और अन्य कचरा निपटान प्रबंधन के नियमों को सख्त किया गया है। साथ ही प्रबंधन से जुड़े नियमों को सरल भी किया गया है।
  4. कचरा प्रोसेसिंग उद्योगों से पर्यावरण और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की आधारभूत जरूरतों के मानक परिचालन प्रक्रिया (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर–एसओपी) के तौर पर निर्धारित किया गया है। इसे कचरे की प्रकृति के तौर पर निर्धारित किया गया है। इसे इससे जुड़े पक्षों द्वारा संग्रहित किया जाना है। साथ ही इस तरह के अधिकार दिए जाने से पहले इसे एसपीसी/पीसीसी की ओर से सुनिश्चित किया जाना है।
  5. खतरनाक कचरा निपटान की इकाइयों की स्थापना और अन्य कचरों के आयात की अनुमति के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की गई है। इस संबंध में प्रक्रियाओं को सरल कर दिया गया है सभी अनुमतियां एक साथ मिला दी गई हैं।
  6. पूरक संसाधन के तौर पर कचरे के इस्तेमाल के लिए निपटान की तुलना में सह-प्रसंस्करण (को-प्रोसेसिंग) को तरजीह देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही ऊर्जा की रिकवरी के लिए इस व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।
  7. ऊर्जा रिकवरी के लिए खतरनाक कचरे के सह-प्रसंस्करण की अनुमति की प्रक्रिया को सरल किया गया है। इसमें ट्रायल बेसिस की तुलना में उत्सर्जन मानक के आधार को तरजीह दी गई है।
  8. नियमों के तहत कचरे के आयात/निर्यात के लिए दस्तावेजी नियम काफी सरल कर दिए गए हैं। आयात/निर्यात होने वाले कचरे की सूची संशोधित की गई है।
  9. दोबारा इस्तेमाल के लिए धातुओं की रद्दी, पेपर रद्दी, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के आयात के लिए मंत्रालय की अनुमति लेने का नियम खत्म कर दिया गया है।
  10. कचरा प्रोसेसिंग उद्योग से स्वास्थ्य और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की मूलभूत जरूरतों को कचरे के हिसाब से मानक परिचालन प्रक्रिया (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर- एसओपी) के तौर पर निर्धारित किया गया है।
  11. खतरनाक और अन्य कचरे को पर्यावरण सुरक्षित तरीके से निपटाने के लिए पर्यावरण

सुरक्षित प्रबंधन में राज्यों की जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं

  •  खतरनाक या अन्य कचरे की रीसाइकिलिंग, पूर्व-प्रसंस्करण (प्री-प्रोसेसिंग) के शेड या औद्योगिक स्थान मुहैया कराना।
  • रीसाइकिलिंग, प्री-प्रोसेसिंग और इस्तेमाल की अन्य गतिविधियों में शामिल श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन करन 
  • ऐसे श्रमिकों का समूह तैयार करना ताकि कचरा निपटान की इकाइयां स्थापित की जा सके
  • इस क्षेत्र में कौशल विकास गतिविधियों का आयोजन करना और श्रमिकों का स्वास्थ्य सुनिश्चित करना

निम्नलिखित का आयात प्रतिबंधित है-

  • जानवरों की बेकार वसा और तेल। वनस्पति तेल का कचरा।
  • घरेलू कचरा
  • क्रिटिकल केयर से जुड़े चिकित्सकीय उपकरण
  • सीधे इस्तेमाल के लिए लाए जाने वाले टायर
  • पेट बोतल समेत ठोस प्लास्टिक कचरा
  • इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली रद्दी से जुड़ा कचरा
  • सॉल्वेंट रूप वाले अन्य रासायनिक कचरा

समुचित खतरनाक कचरा प्रबंधन

  • पर्यावरण सुरिक्षत तरीके से कचरे का संग्रह, भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन और शोधन से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरनाक खतरे का असर कम हो जाता है। खतरनाक कचरों के निपटान के कई तरीके हैं।
  • दुनिया के ज्यादातर देश पर्यावरण सुरक्षित तरीके से खतरनाक कचरे को निपटाने को प्राथमिकता देते हैं। भारत भी इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। अलग-अलग इकाइयों से पैदा होने वाले खतरनाक कचरे को निपटाने के लिए छोटे पैमाने पर शोधन सुविधाएं स्थापित की जा सकती हैं।
  • इन्हें कचरे का भंडारण करने और निपटान सुविधा वाले साझा कचरा शोधन सुविधाओं में भी निपटाया जा सकता है। देश में इस तरह की 40 खतरनाक साझा कचरा निपटान सुविधाएं हैं। देश के 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में खतरनाक कचरों के शोधन भंडारण और निपटान सुविधाओं (टीएसडीएफ) वाले 40 साझा शोधन सुविधाएं मौजूद हैं।
  • कचरा निपटाने वाली इकाइयां पूरक संसाधनों के तौर पर इन कचरों से धातु और ऊर्जा रिकवर करने के लिए एसिड बैटरी की रद्दी, इस्तेमाल तेल, इस्तेमाल कैटेलिस्ट और अन्य रददी सामान जैसे पुराने और इस्तेमाल किए गए टायर, पेपर रद्दी, धातु की रद्दी आदि का इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर करते हैं। इसलिए इस तरह के कचरों का इस्तेमाल रीसाइकिलिंग के जरिये करने को प्राथमिकता दी जाती है।
  • इनसे संसाधनों की रिकवरी के लिए लैंडफिल का भट्टी का इस्तेमाल से भी बचने को प्राथमिकता दी जाती है। देश में 1080 रजिस्टर्ड रिसाइकलर हैं। 47सीमेंट संयंत्रों को सह-प्रसंस्करण के लिए अनुमति दी गई है। 108 उद्योगों को खतरनाक कचरे को दोबारा इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

गैर वैज्ञानिक तरीके से खतरनाक और अन्य कचरे के निपटान की समस्या

  • कचरे को जलाने या भट्टी में झोंकने (बिजली की भट्ठियां– इनसिनिरेटर) से विषैले धुआं और गैस जैसे डायोक्सिन और फ्यूरेन पैदा होता है। इससे पारा, भारी धातु भी निकलता है जो वायु प्रदूषण पैदा करता है और इससे मानव स्वास्थ्य को खतरा होता है।
  • पानी में कचरा बहाने या नगरपालिकाओं की ओर निर्धारित जगह में कचरा फेंकने से विषैले तत्व जमीन और पानी में रिस जाते हैं। इससे पानी प्रदूषित होता है और जमीन की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इससे मानव स्वास्थ्य को भी बड़ा खतरा पैदा होता है।
  • जो लोग इस तरह के कचरे के निपटान के काम में लगे होते हैं उन्हें तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के अलावा चर्म रोग, वशांनुगत कमियां, कैंसर हो सकता है। इसलिए खतरनाक कचरों को समुचित ढंग से निपटाया जाना चाहिए।
  • इसके लिए एक समुचित और सुव्यवस्थित प्रबंधन होना चाहिए। इस प्रबंधन से ही खतरनाक कचरों को पर्यावरण सुरक्षित तरीके से निपटाया जा सकते है।
  • इस प्रबंधन के तहत खतरनाक कचरे का कम से कम उत्पादन, रोकथाम, दोबारा इस्तेमाल, रिकवरी और सह-प्रसंस्करण पर जोर देना होता है। इसके तहत इस तरह के कचरे के सह-प्रसंस्करण और सुरक्षित निपटारा प्राथमिकता होनी चाहिए।

नए खतरनाक और अन्य कचरों के बारे में सलाह-मशविरे की प्रक्रिया:-

  • खतरनाक और अन्य कचरे (प्रबंधन और मैनेजमेंट एंड ट्रांसबाउंडरी मूवमेंट) के नियम जुलाई, 2015 में प्रकाशित किए गए थे। उस दौरान इससे जुड़े सुझाव और आपत्ति आमंत्रित किए गए थे। इसके तहत सरकारी संगठनों, संस्थानों और अन्य लोगों से 473 सुझाव/आपत्तियां आईं।
  • मसौदा नियमों को कचरा निपटान से जुड़े उद्योगों के साथ भी साझा किया गया। केंद्र सरकार, सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों को भी ये नियम भेजे गए।
  • इसके बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरू में कचरा निपटान से जुड़े सभी पक्षों के साथ सलाह-मशविरे के लिए कई बैठकें हुईं। इस बारे में गठित एक कार्यसमूह, जिसमें कई तकनीकी जानकारी और इस मामले के विशेषज्ञ हैं ने इन सुझावों और आपत्तियों की जांच की।
  • इसके बाद कार्य समूह की सिफारिश पर मंत्रालय ने खतरनाक और अन्य कचरा (प्रबंधन और सीमापार आवागमन -मैनेजमेंट एंड ट्रांसबाउंडरी मूवमेंट), 2016 के नियम प्रकिशत किए।

6) नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाकर और जल का दक्षता से उपयोग करके जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटा जा सकता है

  • उद्योगों को जल का दक्षता से उपयोग करने और भट्ठी तथा अन्‍य उद्योगों से तरल पदार्थ बिल्‍कुल न बहने देने के लिए कहा गया है। 
  • तीन R अर्थात् – रिकवर यानी बहाल, रिसाइकल यानी पुन:चक्रण और रियूज टैक्‍नोलॉजी यानी प्रौद्योगिकी का पुन: इस्‍तेमाल करने की नीति अपनाते हुए उद्योगों में पानी की जरूरत में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्‍य तय किया गया है। निर्माण उद्योग को जल संचित करने और उसे फिल्‍टरिंग के माध्‍यम से बोरवैल में रिचार्ज करने जैसे नवाचारों के माध्‍यम से उसका कारगर इस्‍तेमाल करने के लिए कहा गया है। 
  • जल प्रदूषण के स्‍तर में कमी लाने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए समस्‍त कचरा प्रबंधन नियमों में आमूल-चूल बदलाव किया गया है। वर्तमान में, करीब 50 प्रतिशत अपशिष्‍ट नदियों, कुओं, जलाशयों, समुद्र आदि में चला जाता है और उनके जल को प्रदूषित कर देता है। नये पर्यावरणीय नियमों के माध्‍यम से पानी के प्रदूषण में कमी लायी जा सकती है। 
  • सभी आरक्षित वनों में गहन जल संभरण विकास कार्यक्रम शुरू किये गये हैं, ताकि जल और चारे में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकें, जिससे पशु जीवन को बरकरार रखा जा सकेगा।
  • नदियों को सूखने से बचाने के लिए नये टिकाऊ रेत खनन नियम लाने होंगे। नये नियम का सार यह है कि रेत खनन की मात्रा और जगह उपग्रह के माध्‍यम से नदी के मानचित्रण के द्वारा तय की जाए, ताकि यह पता चल सकें कि कहां और कितनी रेत मौजूद है।
  •  नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में विशेष वनरोपण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। 
  • नदियों को जोड़ने की योजनाओं को प्रोत्‍साहित करना। केन-बेतवा को मंजूरी देने पर विचार किया जा रहा है और उपयुक्‍त पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ इस बारे में जल्‍द फैसला लिया जाएगा। 
  • कड़े प्रदूषण नियमों के कारगर कार्यान्‍वयन से गंगा में औ‍द्योगिक प्रदूषण में 30 प्रतिशत कमी लाने में सफलता मिली है। श्री जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री का मंत्र – प्रत्‍येक बूंद से अधिकतम फसल मार्ग निर्देशक सिद्धांत है। 

7) नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बी सी ऐ एस) ने अपनी 29 वीं वर्षगाँठ : सुरक्षा के लिए एक मजबूत लेखा परीक्षण दांचे के निर्माण

प्रमुख बिंदु :                                                          

  • नागरिक उड्डयन सुरक्षा ढाँचे को विभिन्न नागरिक उड्डयन संचालनों में सक्रिय सभी कंपनियों को सहयोजित तथा मजबूत लेखा परीक्षा निरीक्षण होना चाहिए |
  • विकास की अनिवार्यता तथा नागरिक सुरक्षा की अनिवार्यता के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित किया |
  • अप्रयुक्त तथा कम प्रयुक्त हवाई अड्डों के जरिये क्षेत्रीय संपर्कों के निर्माण द्वारा हवाई उधान को आम आदमी तक लेन की योजना |
  • हवाई अड्डा केन्द्रित सुरक्षा के स्थान पर किफायती ,वायुयान केन्द्रित सुरक्षा का निर्माण होना चाहिए |
  • प्रौद्योगिकी के उपयोग के सम्बन्ध में विघ्नकारी तत्वों से सुरक्षित रखने के लिए ,तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी की जरूरत पर ध्यान दिया गया |

         ध्यातव्य है किभारत अब नागरिक सुरक्षा के मामले में वैश्विक रूप से अग्रणी देशों में हैं | वैश्विक सुरक्षा लेखा परीक्षण कार्यक्रम के तहत अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन  संगठन (आई सी एस ओ ) प्रत्येक चार वर्षों पर विभिन्न सदस्य देशों के लेखा परीक्षण का संचालनकरता है |

  • उपयोग किये जाने वाले तीन मानदण्ड-
  • आठ अहम् तत्वों का कारगर क्रियान्वयन
  • परिशिष्ट १७ मानदंडों के साथ औसत अनुपालन
  • प्रोटोकॉल प्रश्न संकेतक के लिए विश्व औसत 66-70% के दायरे में है |

8) मातृ और शिशु मृत्‍यु दर में कमी के लिए परिवार नियोजन प्रमुख रणनीति

प्रमुख बिंदु:-

  • मातृ और शिशु मृत्‍यु दर में कमी लाने के लिए परिवार नियोजन प्रमुख रणनीति के रूप में उभरा है और परिवार नियोजन के उपागमों में बड़ा बदलाव आया है |
  • परिवार नियोजन मीडिया जागरुकता अभियान के लिए नया लोगो लांच किया गया । यह लोगो देश में परिवार नियोजन से जुड़े विभिन्‍न विषयों से संबंधित जागरुकता बढ़ाने के लिए 360 डिग्री की सूचना संचार योजना के साथ लांच किया गया।
  • परिवार नियोजन के नये दृष्टिकोण में मातृ तथा शिशु स्‍वास्‍थ्‍य को केंद्र में रखा गया है। नये सूचना संचार माध्‍यम के लिए श्री अमिताभ बच्‍चन को ब्रांड ऐमबेसेडर बनाया गया है।
  • आर्इईसी पैकेज में अनेक टीवी और रेडियो विज्ञापन हैं, जिनमें माता-पिता,सास, पति तथा परिवार के अन्‍य सदस्‍यों की भूमिका पर बल देने के साथ-साथ स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों, डाक्‍टरों, नर्सों, एएनएम तथा आशाकर्मियों पर भी फोकस किया गया है|
  • परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया जाना तथा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्‍यक है।
  • स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने गर्भनिरोधक निरोध की नये पैकेजिंग को भी लांच किया ताकि इसके इस्‍तेमाल में वृद्धि हो। भारतीय महिलाओं को अधिक उपाय उपलब्‍ध कराने के लिए राष्‍ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत जनस्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली में इनजेक्‍टेबल सेंटक्रोमैन तथा पीओपी का मिश्रित निरोधक तैयार किया गयाहै। 
  • परिवार नियोजन से लोगों को यह निर्धारित करने का अधिकार मिलता है कि वह अपने बच्‍चों की संख्‍या कितनी रखें और किस अंतराल पर बच्‍चे पैदा करें। इस समाज में महिलाओं की स्थिति में मजबूती आती है और शिशु मृत्‍यु दर में भी कमी होती है। 
  • परिवार नियोजन आरएमएनसीएच + ए रणनीति का प्रमुख स्‍तंभ है। इससे महिलाओं और बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार हो सकता है और इसमें पहले बच्‍चे के जन्‍म में विलंब और बच्‍चों के जन्‍म के बीच अंतराल पर फोकस किया गया है।
  • जनसंख्‍या को स्थिर बनाने के लिए बच्‍चे को बचाना, मां की सेहत विवाह की उम्र में वृद्धि पहले बच्‍चे की पैदाइश में देरी, बच्‍चों के जन्‍म में अधिक अंतर में वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, साक्षरता तथा गरीबी दूर करने के प्रयास आवश्‍यक हैं।
  • भारत ने विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य सूचकांकों के मामले में अच्‍छी प्रगति की है।1990-2000 के 54 प्रतिशत की दशकीय वृद्धि दर में कमी आई है और 2001-11 में दशकीय वृद्धि दर 17.64 प्रतिशत हो गई। कुल प्रजनन दर जहां 1951 में 6 थी वहीं 2013 में घटकर 2.3 रह गई। उन्‍होंने बताया कि 24 राज्‍य एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रजनन के प्रतिस्‍थापन स्‍तर 2.1 या उससे कम को हासिल कर लिया है|
  • प्रसव पश्‍चात बंध्‍याकरण के लिए तमिलनाडु को पुरस्‍कृत किया गया। मध्‍य प्रदेश को पीपीआईयूसीडी के लिए तथा बिहार को महिला बंध्‍याकरण और हिमाचल प्रदेश को पुरुष बंध्‍याकरण के लिए पुरस्‍कार दिए गए।
  • सूई  से  दिए  जाने वाले  गर्भनिरोधक   के  लिए तकनीकी  दिशा निर्देश   मिशन इंद्रधनुष के लिए मोबाइल ऐप के साथ लांच किया |

9) भारत जल सप्ताह-2016

KJAH

  • देश के सतत विकास के लिए जल संरक्षण बहुत जरूरी है। इस उद्देश्‍य की पूर्ति के लिए सरकार के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा। न्‍यूनतम जल के अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए इस क्षेत्र में नई तकनीक के उपयोग की आवश्‍यकता है।
  • देश में जल की उपलब्‍धता और उसकी गुणवत्‍ता में गिरावट सबके लिए चिंता का विषय है। उन्‍होंने कहा कि दुनियाभर में हो रहे जलवायु परिवर्तनों से भी जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
  • नदी जोड़ो परियोजना के जरिए देश में जल की उपलब्‍धता बढ़ाने के लिए जल क्रांति अभियान और जल ग्रामीण योजना का उद्देश्‍य जल संरक्षण के क्षेत्र में पंचायती राज संस्‍थाओं, स्‍थानीय निकायों और सभी हितधाराकों को समान रूप से साथ लेकर आगे बढ़ना है।
  • चूंकि  सिंचाई के क्षेत्र में निवेश का लाभ अन्‍य क्षेत्रों की तुलना में बहुत जल्‍दी मिलता है और देश के समग्र और आर्थिक विकास में इसका प्रभाव तत्‍काल दिखना शुरू हो जाता है।
  • मानसून कमजोर रहने के कारण कृषि पर बुरा असर पड़ता है लेकिन बेहतर जल प्रबंधन के जरिए हम इस समस्‍या से निपट सकते है। जल के बेहतर इस्‍तेमाल के लिए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में विशेष रूप से मध्‍य प्रदेश ने उल्लेखनीय कार्य किया है और  पिछले आठ दस वर्षों में राज्‍य में कृषि की स्थिति में जबरदस्‍त सुधार आया है।
  • प्रधानमंत्री के प्रत्‍येक बूंद से अधिकतम फसल के नारे जैसा देश में अनियमित मानसून को देखते हुए बेहतर जल प्रबंधन बहुत जरूरी हो गया है
  • पानी बचाओ-पानी बढ़ाओ’’ के तहत हमें ऐसे उपाय करने होंगे जिनसे उद्योगों में पानी की खपत कम हो और जो भी पानी वहां उपयोग किया जाए वह संशोधित जल ही हो।
  • सरकार उद्योगों में पानी की खपत के बारे में नए मानक तय करेंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भवन निर्माण में सिर्फ संशोधित जल का ही उपयोग हो और वहां वर्षा जल संचयन को अनिवार्य किया गया है।
  •  देश में लघु और सीमांत किसान पानी की भारी किल्‍लत से जूझ रहे है।  भारत में प्रति व्‍यक्ति जल की उपलब्‍धता चिंताजनक स्‍तर पर है। इसलिए जरूरी हो गया है कि हम देश में बेहतर जल प्रबंधन पर ध्‍यान दें। इस वर्ष देश में 5 लाख नए कुएं और तालाब खोदे जाएंगे। सिंचाई के क्षेत्र में इजराइल से हम सीख सकते  है।
  •  इजराइल के कृषि मंत्री श्री यूरी एरियल ने कहा कि दुनियाभर में जल की आपूर्ति में आ रही निरंतर गिरावट को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि मानव सभ्‍यता, जल संचयन और जल प्रबंधन की बेहतर तकनीक का उपयोग करे। भारत और इजराइल, जल प्रबंधन और जल सुरक्षा के क्षेत्र में एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते है।
  • इस अवसर पर जल संरक्षण  के लिए एक एंड्रायड मोबाइल एप्‍लीकेशन ‘जल संचयन’ भी लांच किया जिसमें एक ही मंच पर वर्षा जल संचयन के समस्‍त घटक उपलब्‍ध हैं। यह एप्‍लीकेशन उपभोक्‍ता को इंटरएक्टिव मॉड्यूल के जरिए किसी भी स्‍थान पर संभावित वर्षा का अनुमान लगाने में सहायता करेगा। यह एप्‍लीकेशन के क्षेत्र में कार्यरत प्राधिकारियों, एजेंसियों, तकनीकी संस्‍थानों और जमीनी स्‍तर पर सामुदायिक संगठनों से संपर्क की जानकारी भी प्रदान करता है।  
  • मानव सभ्‍यता को जल के महत्‍व को समझना चाहिए और इसका समझदारी से प्रयोग करना बहुत जरूरी है। जल की किल्‍लत, खराब गुण्‍वत्‍ता वाले जल ओर अपर्याप्‍त स्‍वच्‍छता से गरीब परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा, आजीविका के विकल्‍पों और शिक्षा के अवसरों पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है।
  •  जहां एक ओर सरकार की प्राथमिक चिंता देश में सबको पर्याप्‍त मात्रा जलापूर्ति  सुनिश्चित कराना है, वहीं दूसरी ओर हम सबका दायित्‍व बनता है कि हम जल की एक एक बूंद की कीमत समझें और उसकी बर्बादी न करें।बच्‍चों के पाठ्यक्रम में जल प्रबंधन को एक विषय के रूप में शामिल किया जाए ताकि नई पीढ़ी इस महत्‍वपूर्ण विषय पर बचपन से ही सही संस्‍कार प्राप्‍त कर सके। देश में भू-जल के गिरते हुए स्‍तर को ऊपर लाने के लिए कई उपाय करने होंगे।
  • इनमें से एक यह हो सकता है कि किसानों को खेतों में ट्युब्‍वेल लगाने की अनुमति तभी दी जाए जब वे खेत में ड्रीप सिंचाई के लिए तैयार हो जाए। सरकार से इसके लिए सब्सिडी भी दी जानी चाहिए।मद्य प्रदेश सरकार केन बेतवा नदी जोड़ों परियोजना पर पूरी तरह से केंद्र के साथ है और उसे अपना भरपूर सहयोग दे रही है ताकि इसे जल्‍द से जल्‍द सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।

10) यूआईडीएआई के ‘आधार’ ने छुआ 1 अरब (100 करोड़) का आंकड़ा, भारत के लिए ऐतिहासिक दिन

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 4 अप्रैल, 2016 को 100वां करोड़ आधार जारी कर एक मील का पत्थर स्थापित किया है। पहला आधार साढ़े पांच वर्ष पहले 2010 में में जारी किया गया था।  सरकार द्वारा कुछ दिन पहले ही ऐतिहासिक कानून, आधार अधिनियम 2016 (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ, और सेवाओं के लक्षित वितरण) को अधिसूचित करने के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है।

वर्तमान में आधार 18 वर्ष से अधिक की 93 फीसदी जनसंख्या को कवर चुका है। (2015 की अनुमानित जनसंख्या आंकड़े)

वर्तमान तिथि तक, 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आधार की संख्या 90 फीसदी पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 13 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह संख्या 75-90 फीसदी के बीच है।

आधार की उपलब्धियां

  • 100 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार है।
  • भारत में73.96 करोड़ (93 फीसदी) वयस्कों के पास आधार है।
  • 5-18 वर्ष के22.25 करोड़ (67 फीसदी) बच्चों के पास आधार है।
  • 5 वर्ष से कम आयु के2.30 करोड़ (20 फीसदी) बच्चों के पास आधार है।
  • प्रत्येक दिन5-7 लाख लोग आधार के लिए पंजीकरण करवा रहे हैं।
  • वर्तमान में आधार विश्व का सबसे बड़ा ऑनलाइन डिजिटल पहचान प्लेटफार्म बन गया है।

आधार के लाभ

  • डीबीटीएल (पहल) -14,672 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।
  • पीडीएस -4 राज्यों, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी और दिल्ली में 2,346 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।
  • छात्रवृत्ति – तीन राज्यों, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पंजाब में276 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।
  • पेंशन (एनएसएपी) -3 राज्यों, झारखंड, चंडीगढ़ और पुडुचेरी में 66 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।

आधार के उपयोग

  • 25.48 करोड़ बैंक खाते यूनिक आधार से जुड़ चुके हैं।
  • 12.28 करोड़ से अधिक (71%) एलपीजी कनेक्शन आधार से जुड़ चुके हैं।
  • 11.39 करोड़ (45%) राशन कार्ड आधार से जुड़ चुके हैं।
  • 5.90 करोड़ (60%) नरेगा कार्ड आधार से जुड़ चुके हैं।

आधार प्रमाणीकरण

  • यूआईडीएआई द्वारा150.6 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन किया जा चुका है।
  • यूआईडीएआई द्वारा8.4 करोड़ से अधिक ई-केवाईसी लेनदेन हो चुका है।
  • यूआईडीएआई प्रति दिन40 लाख से अधिक लेन-देन को प्रमाणित करता है।

यूआईडीएआई के पास वर्तमान में प्रत्येक दिन 15 लाख से ज्यादा आधार कार्ड जारी करने और प्रेषित करने की क्षमता है। 37,304 नामांकन केंद्र देश भर में फैले हुए हैं और इसमें 3,76,543 प्रमाणित ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

पिछले 2 वर्षों के दौरान आधार के आवेदन पत्रों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। 31 मार्च, 2016 तक आधार कार्ड प्रमाणीकरण के उपयोग से लेनदेन की संख्या 150.6 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो 31 मई, 2014 तक 8.82 करोड़ थी। ई-केवाईसी लेन-देन की संख्या  31 मई, 2014 तक 2.7 लाख थी, जो 31 मार्च, 2016 तक बढ़कर 8.4 करोड़ हो गई।

आधार पेमेंट ब्रिज (एपीबी) को विकसित किया गया है जो लाभार्थी को आधार संख्या के द्वारा उसकी बैंक विवरण को हासिल किए बिना उसके लाभ/अन्य भुगतानों को सीधे लाभार्थी के खाते तक पहुंचाता है। आधार पेमेंट ब्रिज (एपीबी) में वर्तमान में 23 करोड़ लोग अपने बैंक खातों को आधार से जोड़ चुके हैं।

भारत सरकार ने विभिन्न योजनाओं और पहलों को आधार से जोड़कर यूआईडीएआई को नई गति दी है, जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), मनरेगा, पेंशन, छात्रवृत्ति, डीबीटीएल, यूएएन (ईपीएफओ), पीडीएस,पासपोर्ट, सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति प्रणाली शामिल हैं।

11) राज्य/ केन्‍द्रशासित प्रदेशों की सरकारों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रियों और सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन 

  • राज्‍य और केन्‍द्रशासित प्रदेश अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण योजनाओं को लागू करने मे बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका है क्योंकि वे हाशिए पर खड़े समूहों के लिए लाभ लेने हेतु हितधारक रहे हैं। राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण योजनाओं के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण संचार एजेंसियां है।
  • यह एक दूसरे के खिलाफ नहीं बल्कि गरीबी के खिलाफ लड़ाई है। सुझाव की जरूरत और राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों के सामने आ रही विभिन्‍न समस्याओं के समाधान के लिए एक विन्‍डो बनाई जाएगी
  • जमीनी स्‍तर पर योजना को लागू करने और उनकी निगरानी होनी चाहिए |  कार्य पूर्ण होने और उपयोगिता प्रमाण-प्रत्रों को समय पर प्रस्‍तुत होने चाहिए  ताकि केन्‍द्र सरकार धन जारी कर सके।
  • केन्‍द्र सरकार पूरे देश में वक्‍फ सम्‍पत्तियों का विकास करना चाहती है ताकि अल्‍पसंख्‍यक कल्याण गतिविधियों के लिए राज्‍यों/केन्‍द्रशासित प्रदेशों का राजस्‍व बढ़ाया जा सके। 
  • शिक्षा विकास का आधार है इसलिए अल्‍पसंख्‍यक युवाओं को कौशल विकास के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्रालय पूरे देश में लगभग 86 लाख प्रि-मैट्रिक, पोस्‍ट–मैट्रिक और मैरिट एवं माध्‍यम छात्रवृत्ति प्रदान करता है। इनमें से 30 प्रतिशत छात्रवृत्तियां ल‍ड़कियों के लिए निर्धारित हैं। हालांकि 46 प्रतिशत से भी अधिक लड़कियां छात्रवृत्तियां प्राप्‍त कर रही हैं।
  • उद्यमिता कार्यक्रम के तहत महिलाओं पर विशेष ध्‍यान दिया जा रहा है।

 यह पहली बार हुआ है की संशोधित बजट अनुमान घटाये नहीं गये है और पिछले वित्तीय वर्ष में जारी किये गये समस्‍त धन का उपयोग किया |

12) राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना 

प्रमुख बिंदु :-

  • राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना एक केन्द्रीय परियोजना है और इसके लिए 7674 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए है। इसमें 3,640 करोड़ रुपए राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना (एनएचपी) के लिए और 39,7674 करोड़ रुपए राष्ट्रीय जलसूचना केन्द्र (एनडब्ल्यूआईसी) के लिए रखा गया है।
  • इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा।
  • एनडब्ल्यूआईसी जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत स्वतंत्र संगठन होगा
  • राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना से जल-मौसम विज्ञान संबंधित डाटा एकत्रित करने में मदद मिलेगी और इसका वास्तविक समय के आधार पर विश्लेषण किया जाएगा।
  • इसे राज्य/जिला/गांव स्तर पर देखा जा सकता है। यह परियोजना पूरे देश को कवर करेगी, पहले की जलविज्ञान परियोजनाएं केवल 13 राज्यों को कवर करती है
    प्रमुख अंग :-
  • क.) यथावत जल-मौसम निगरानी प्रणाली तथा जल-मौसम डाटा अधिग्रहण प्रणाली। ख.) राष्ट्रीय जल सूचना केन्द्र की स्थापना।  ग.) जल संसाधन संचालन तथा प्रबंधन प्रणाली। 

    घ.) जल संसाधन संस्थान तथा क्षमता सृजन। 

    कुल आवंटन में से 50 प्रतिशत राशि यानी 8837 करोड़ रुपए विश्व बैंक से ऋण के रूप में मिलेगा, जिसका पुनः भुगतान केन्द्र सरकार करेगी। शेष 50 प्रतिशत राशि यानी 1839.8837 करोड़ रुपए बजटीय समर्थन से केन्द्रीय सहायता के रूप में मिलेगी। 

    विश्व बैंक की ऋण राशि तथा राज्यों और केन्द्रीय संगठनों को मिलने वाली केन्द्रीय सहायता अनुदान के रूप में दी जाएगी। 

    पृष्ठभूमि 

  • राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना का उद्देश्य (नेशनल हाइड्रोलोजी प्रोजेक्ट –एनएचपी) विश्वसनीय और समयबद्ध ढंग से जल संसाधन से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन, भंडारण, मिलान और प्रबंधन करना है।
  • यह परियोजना जल संसाधनों के आकलन, बाढ़ प्रबंधन, जलाशय प्रबंधन, सूखा प्रबंधन आदि के लिए डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के जरिये उचित फैसला करने जरिया/व्यवस्था मुहैया कराएगी।
  • एनएचपी सूचना व्यवस्था और आधुनिक तकनीक जैसे रिमोट सेंसिंग के जरिये राज्य और केंद्रीय सेक्टरों के संगठनों में जल संसाधन प्रबंधन में क्षमता निर्माण में मदद करेगी।
  • जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने जल प्रबंधन के प्रबंधन में परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं।

मंत्रालय ने नदी बेसिन से जुड़े नजिरये को अपनाकर इस दिशा में परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। देश में बेहतर तरीके से जल संसाधन का इस्तेमाल और प्रबंधन, पर्याप्त आंकड़े, संसाधन आकलन, डीएसएस आदि तेजी से घटते जल संसाधन के बेहतर आवंटन और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए जरूरी है। 

13) “वन रैंक-वन पेंशन” का कार्यान्वयन 

प्रमुख बिंदु :-

  1. प्रदत्त लाभ 01 जुलाई, 2014 से प्रभावी होंगे। 2. वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त पेंशन धारियों को मिलने वाली न्यूनतम और अधिकतम पेंशन के औसत के अनुसार समान पद और समान सेवाकाल के आधार पर 01 जुलाई, 2014 के पूर्व के पेंशनधारियों की पेंशन दोबारा तय होगी। जो पेंशनधारी औसत से अधिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा की जाएगी। 3. इसके लाभ युद्ध में शहीद सैनिकों कि विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम पेंशनधारियों सहित परिवार-पेंशनधारियों को भी मिलेंगे। 

    4. जो कर्मी सेना नियम, 1954 के नियम, 13 (3)1 (i)(बी), 13(3) 1(iv) या नियम, 16बी या नौसेना या वायुसेना के समान नियमों के तहत अपने निवेदन पर डिस्चार्ज होने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें “वन रैंक-वन पेंशन” के लाभ नहीं मिलेंगे। ये भावी प्रभाव से लागू होंगे। 

    5. बकाया राशि का भुगतान 04 छमाही किस्तों में होगा। बहरहाल परिवार-पेंशनधारियों को बकाया राशि का भुगतान एक किस्त में किया जाएगा, जिनमें विशेष/उदार परिवार-पेंशन तथा शौर्य पुरस्कार विजेता शामिल हैं। 

    6. भविष्य में हर पांच साल में पेंशन दोबारा तय होगी। 

    7. 14.12.2015 को पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल. नरसिम्हा रेड्डी की अध्यक्षता में गठित न्यायिक समिति भारत सरकार द्वारा दिए गए संदर्भों पर अपनी रिपोर्ट छः माह में सौंपेगी। 

“वन रैंक-वन पेंशन” के लागू हो जाने पर रक्षा बलों के पेंशनधारियों/परिवार-पेंशनधारियों को बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी। न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी की गठित न्यायिक समिति से 07.11.2015 को होने वाले “वन रैंक-वन पेंशन” आदेश के क्रियान्वनय से उत्पन्न असंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी। 

समय-पूर्व सेवानिवृत्त होने वाले लोगों सहित “वन रैंक-वन पेंशन” के लागू होने से बकाया राशि के भुगतान के संबंध में 10925.11 करोड़ रुपए और वार्षिक वित्तीय बोझ 7488.7 करोड़ रुपए होगा।

31 मार्च, 2016 तक 15.91 लाख पेंशनधारियों को “वन रैंक-वन पेंशन” की पहली किस्त दी गई, जिसकी कुल रकम 2,861 करोड़ रुपए है।

सेवाकाल की अवधि जैसी सूचनाओं के अंतराल को समाप्त करने के बाद 1.15 लाख पेंशनधारियों के मामले पर प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया शुरू करने की सूचना जमा की जा रही है।

14) सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा कच्‍चे तेल के आयात के संबंध में संशोधित नीति 

प्रमुख बिंदु :-

  • कच्‍चे तेल के आयात पर वर्तमान नीति में बदलाव लाने को मंजूरी दी गयी और तेल विपणन कंपनियों को अपनी नीतियां निरूपित करने का अधिकार प्रदान किया गया। इससे कच्‍चे तेल की खरीद के लिए ज्‍यादा दक्ष, लचीली और गतिशील नीति उपलब्‍ध होगी, जो अंतत: उपभोक्‍ताओं को लाभान्वित करेगी।
  • कच्‍चे तेल के आयात की वर्तमान नीति को वर्ष 1979 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। वर्ष 2001 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस नीति में कुछ संशोधनों को मंजूरी दी थी । वर्तमान नीति ने हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी तेल विपणन कंपनियों की सामूहिक ऊर्जा आवश्‍यकताओं को निरंतर पूरा किया है, लेकिन बदलते समय के साथ इस नीति में बदलाव लाने की आवश्‍यकता है।
  • बदलते भू-राजनीतिक वातावरण में, कच्‍चे तेल के आयात की नीति को वर्तमान आवश्‍यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए उन्‍हें संशोधित किये जाने की जरूरत है।
  • बाजार में दक्षता के साथ प्रतिस्‍पर्धा करने के लिए स्‍थान के आधार पर कच्‍चे तेल की खरीद की वर्तमान बाजार पद्धतियों को पूरी तरह अपनाए जाने की आवश्‍यकता है|
  • वर्तमान नीति में इस संदर्भ में कुछ सीमाएं और नियंत्रण हैं, जो संभावित स्रोतों और खरीद के तौर-तरीकों को सीमित करते हैं।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2001 में लिए गए फैसले के बाद, भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में से नवरत्‍न और महारत्‍न कंपनियों को मत्‍वपूर्ण अधिकार सौंपें। इन कंपनियों को प्रचालन, वित्‍तीय एवं निवेश संबंधी विविध मामलों में स्‍वायत्‍ता प्रदान की |
  • सरकारी तेल विपणन कंपनियों को सीवीसी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कच्‍चे तेल के आयात के लिए अपनी स्‍वयं की नीतियां निरूपित करने और उन्‍हें संबंधित बोर्ड से अनुमोदित कराने का अधिकार होगा।

 न्‍यूनतम शासन, अधिकतम प्रशासन के सिद्धांत के अनुरूप इस उपाय से तेल कंपनियों के प्रचालन और व्‍यावसायिक लचीलेपन में वृद्धि होगी और वे कच्‍चे तेल के आयात के लिए सबसे ज्‍यादा प्रभावपूर्ण खरीद पद्धतियां अपनाने में सक्षम हो सकेंगी। 

 

 

 

 

Comments (7)

  1. Shuchi
    Apr 18, 2016 at 11:04 pm

    धन्यवाद ।। very helpful

  2. Ankit Kumar
    Apr 19, 2016 at 5:40 am

    Excellent sir thanks a lot

  3. Tammana Singh
    Apr 19, 2016 at 6:17 am

    Very Useful for IAS Exam

  4. Zubair Khan
    Apr 19, 2016 at 6:20 am

    Jaankari Bahaut aachi hai dhanyawad sir ji

  5. Akshara Gautam
    Apr 19, 2016 at 6:22 am

    You are doing great effort for Hindi medium

    • upscgetway
      Apr 19, 2016 at 12:24 pm

      thanks akshara

  6. Bhumika maurya
    Apr 19, 2016 at 6:26 am

    Thanks good data

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