government should think about Military Reforms(सैन्य सुधार की रूपरेखा हुई तैयार )

सैन्य सुधार की रूपरेखा हुई तैयार इस विचार को अब करें साकार

military-helicopters-attackहाल ही में छोटे पैमाने पर जल-थल रक्षा अभ्यास ‘जल प्रहार’ का आयोजन हुआ। इस दौरान भारतीय सेना ने तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान की अवधारणा को कुछ तवज्जो दी, जिसे अमेरिका जैसी मजबूत सेनाओं ने दशकों पहले ही अंजाम दे दिया। इसका आयोजन भारत में तीनों सेनाओं की इकलौती एकीकृत कमान अंडमान एवं निकोबार कमान (एएनसी) में हुआ, जिसका अर्थ है कि यहां इसमें तीनों सेनाओं का प्रतिनिधित्व है और कमान भी तीनों सेनाओं के प्रमुखों के हाथ है। इसमें सौ सैनिकों, नौसेना की पूर्वी कमान द्वारा उपलब्ध कराए गए युद्घपोतों और वायु सेना के तीन जगुआर लड़ाकू विमानों ने शिरकत की। सैन्य सुधारों के तहत वर्ष 2001 में एएनसी की स्थापना इस मकसद के साथ की गई थी कि इससे देश भर में इसी तरह के तीनों सेनाओं के ढांचे को खड़ा करने में मदद मिलेगी लेकिन असल में ऐसा हो नहीं पाया। 

 
हालांकि इस आयोजन से इतर सेना प्रमुख का पूरा ध्यान राजस्थान के रेगिस्तान में चल रहे व्यापक स्तर के अभ्यास ‘शत्रुजित’ पर लगा रहा, जिसमें हजारों सैनिकों ने शिरकत की और उसमें वायु सेना का भी कुछ जलवा देखा गया लेकिन यह मुख्य रूप से सेना का ही आयोजन था। इस बीच साल की शुरुआत में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अमेरिकी सेना को ठोस चुनौती देने के लिए तीनों सेनाओं को एकीकृत रूप से सुगठित करने की दिशा में सुधारों का सूत्रपात किया।
 
भारत में दुखद रूप से तीनों सेनाओं के ढांचे पर बहस मुख्य रूप से तीनो सेनाओं के कमांडर की नियुक्ति पर केंद्रित हो जाती है। यह वर्ष 2001 में मंत्री समूह द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार पांच सितारा ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस)’ या वर्ष 2013 में नरेश चंद्रा समिति द्वारा प्रस्तावित चार-सितारा ‘परमानेंट चेयरमैन चीफ ऑफ स्टाफ (पीसीसीओएस)’ की नियुक्ति का रूप लेता है। मगर तीनों सेनाओं के लिए थियेटर (समन्वित) कमान की जरूरत पर बहुत कम ध्यान दिया गया है। इससे एएनसी में 17 अलग-अलग एकल सेना कमानों को तार्किक रूप से पांच से छह त्रि सेना कमानों में बदल जाएगा, जहां तीनों सेनाओं से जुड़ी कॉम्बैट यूनिट होगी। दूरदराज के क्षेत्रों में सैन्य ढांचे और उपकरणों की देखरेख के अलावा नेताओं को समन्वित सैन्य सलाह मुहैया कराने के लिहाज से भी सीडीएस/पीसीसीओएस संगठन को चुस्त और प्रभावी बनाएगा। मगर त्रि सेना थियेटर कमान इस कारण से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह युद्घक्षेत्र में प्रदर्शन को बेहतर बनाएगी।
 
uh-60a-transport-helicopterमगर त्रि सेना ढांचे का विरोध केवल नौकरशाहों और नेताओं द्वारा नहीं होता, जैसा कि जनरल बताते हैं बल्कि सेना के भीतर से भी उतना ही होता है। सेना, नौसेना या वायु सेना प्रमुख अपने ऊपर एक और सैन्य प्रमुख (सीडीएस) या यहां तक कि बराबरी दर्जे वाला पीसीसीओएस भी नहीं चाहते। निश्चित रूप से वे अपनी थियेटर कमान के मामले में अपना रुतबा या नियंत्रण कम होते नहीं देखना चाहते, जो सैन्य बलों की असल ताकत है। मगर यह विरोध दूसरे दर्जे का है, जो राजनीतिक-नौकरशाही पूर्वग्रह के समक्ष मुश्किल से ही ठहरता है, जो ‘अति शक्तिशाली सैन्य प्रमुख’ को लेकर आग्रही हैं। एएनसी और एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) इसलिए अस्तित्व में आ पाए क्योंकि इनसे न तो तीनों सेनाओं और न ही राजनीतिक-अफसरशाही वर्ग को कोई खतरा दिखा। 
 
कमान ढांचा इस सुधार की राह में बड़ा अवरोध है। इसे निश्चित ही दुरुस्त करना होगा। इसे अमेरिका की तर्ज पर तीनों सेनाओं के लिए थियेटर कमांडरों के साथ अंजाम दिया जा सकता है, जिसमें रक्षा मंत्री के जरिये सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करनी हो। प्रत्येक सेना प्रमुख को उनकी कॉम्बैट यूनिट के नियंत्रण से हटाएं और उसे थियेटर कमांडरों को वितरित कर दें, उन्हें कमान की जिम्मेदारी से मुक्त कर उनकी संबंधित सेनाओं के सैनिकों, उपकरणों और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने का दयित्व मिले, जिसके लिए अभी कम वक्त मिल पाता है क्योंकि सभी सेना प्रमुख परिचालन कमान की जिम्मेदारी के बोझ तले दबे हैं।
मौजूदा परिचालन कमान, मसलन-तीनों सेनाओं की ‘प्रशिक्षण कमान’ और वायु सेना की ‘मेंटेनेंस कमान’ संबंधित सेना प्रमुखों के अंतर्गत ही रह सकती हैं। वहीं विशेष बल कमान, साइबर कमान और रणनीतिक बल (परमाणु जखीरा) को थियेटर कमान के तहत रखा जा सकता है। कमान ढांचे से इतर राजनीतिक नेतृत्व किसी भी सेना से पांच सितारा सीडीएस चुन सकता है, जिसका चयन महज वरिष्ठïता के आधार पर न होकर योग्यता और भरोसे के आधार पर किया जाए, जो एक तरह से उनके ‘दूसरे’ सैन्य सलाहकार की भूमिका में होगा। कई मायनों में यह अमेरिकी तंत्र के माफिक होगा, जो प्रशंसनीय रूप से अंतर-महाद्वीपीय वैश्विक चुनौतियों से जूझती है।
 
39b6b30e1e5ba30f307fc0c6826367a5अधिक कमांडरों के बीच शक्ति वितरण से सैन्य तख्तापलट की आशंका वाले राजनीतिक-अफसरशाही वर्ग को भी भरोसा मिलेगा। इसे संभव बनाने के लिए सेना के भीतर रैंक ढांचे को भी बेहतर बनाना होगा। प्रत्येक सेना की परिचालन जिम्मेदारी संभालने वाले थियेटर कमांडर को चार सितारा जनरल (नौसेना एडमिरल सहित) के तौर पर प्रोन्न्नत किया जा सकता है। सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुखों को चार सितारा जनरल ही बनाए रखा जाए, जिससे चार सितारा जनरलों की संख्या 12 हो जाएगी। पांच सितारा सीडीएस सैन्य प्रमुखों के शीर्ष पर होगा। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तविक सैन्य सुधारों का दावा कर सकते हैं। अभी तक इस सरकार ने सैन्य क्षेत्र में किए तमाम चुनावी वादों में केवल कुछ नरमी के साथ वन रैंक-वन पेंशन और एक राष्ट्रीय युद्घ स्मारक बनाने पर ही पहल की है। ढांचागत सुधारों में तीनों सेनाओं के लिए एक कमान, रक्षा संबंधी फैसलों में सेना को शामिल करने, तटीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय सामुद्रिक प्राधिकरण की स्थापना, रक्षा शोध एवं विकास को प्रोत्साहन, बेहतर सीमा प्रबंधन और सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए वेटरन आयोग बनाने का वादा किया था, जिन पर धीमी प्रगति ही हो रही है।  

One Comment

  1. Zubair Khan
    May 06, 2016 at 7:13 pm

    Very useful thanks a lot sir

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