स्टारशॉट प्रोजेक्ट(STAR SHOT PROJECT) : ब्रम्हांड की यात्रा

स्टारशॉट प्रोजेक्ट से ब्रम्हांड की यात्रा 

Printअंतरिक्ष के अन्वेषण के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है, जिसके तहत ब्रम्हांड के सुदूर हिस्सों में सूक्ष्म यान भेजे जाएंगे। यूरी मिलनर और मार्क जुकरबर्ग जैसे दुनिया के खरबपति उद्यमी इस योजना के लिए धन देना चाहते हैं। जानेमाने भौतिकविद् प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग सहित अनेक वैज्ञानिक इसका समर्थन कर रहे हैं। इस स्टारशॉट प्रोजेक्ट से ब्रम्हांड के बड़े राज खुल सकते हैं और मनुष्य उन जगहों के चित्र प्राप्त करने में कामयाब हो सकता है जहां जीवन संभव है। प्रोफेसर हॉकिंग का कहना है कि हमारे और तारों के बीच बहुत बड़ी दूरी है और इस दूरी को पार करना एक कठिन चुनौती है, लेकिन अब हम प्रकाश तरंगों और सूक्ष्म अंतरिक्ष यानों के जरिए इस सीमा को लांघ सकते हैं।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि स्टारशॉट प्रोजेक्ट हमें अल्फा सेंटारी नक्षत्र प्रणाली तक पहुंचा सकता है। अल्फा सेंटारी पृथ्वी से करीब 4.37 प्रकाश वर्ष दूर है। यह हमारे सौरमंडल का सबसे नजदीकी तारामंडल है। सामान्य साधनों से वहां पहुंचने में 30000 वर्ष लगेंगे, लेकिन नए प्रोजेक्ट के अंतर्गत छोड़े जाने वाले सूक्ष्म रॉकेटों के जरिए वहां 20 वर्षो में पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। वैज्ञानिकों का खयाल है कि अल्फा सेंटारी तारामंडल में एक पृथ्वी जैसा ग्रह मौजूद है। प्रस्तावित सूक्ष्म यान पाल युक्त होंगे और प्रकाश की तरंगों से आगे बढ़ेंगे। इनकी रफ्तार प्रकाश की गति की 20 फीसद के बराबर होगी। यानी ये यान 60000 किलोमीटर प्रति सेकेंड के हिसाब से आगे बढ़ेंगे। इस प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि ये यान संभावित ग्रहों की तस्वीरें और अन्य वैज्ञानिक आंकड़े पृथ्वी पर भेजने में सक्षम होंगे।

सूक्ष्म रॉकेट ऐसे कंप्यूटरों से बनाए जाएंगे जिन्हें अत्यंत सूक्ष्म वेफर पर फिट किया जा सकता है। कंप्यूटरों के हिस्सों को छोटा करने का मतलब यह है कि कैमरे, विद्युत आपूर्ति, रॉकेट इंजन, संचालन और संचार उपकरणों को एक छोटी-सी प्लेट पर स्थापित किया जा सकेगा। यह प्लेट एक तरह से संपूर्ण अंतरिक्ष यान के रूप में कार्य करेगी। इन रॉकेटों के निर्माण से पूर्व प्रोजेक्ट के कुछ हिस्से पृथ्वी पर भी निर्मित होंगे। इसमें प्रकाश तरंग छोड़ने वाली लाइटबीमर मशीन और अंतरिक्ष यान का निर्माण शामिल है। सूक्ष्म रॉकेटों को लाइटबीमर से ऊर्जा मिलेगी, जबकि बड़ा अंतरिक्ष यान नन्हें रॉकेटों को प्रक्षेपण के लिए अंतरिक्ष में ले जाएगा। लाइटबीमर से शक्तिशाली लेसर किरणों वायुमंडल में छोड़ी जाएंगी। लेजर किरणों छोड़ने वाले सिस्टम को दक्षिणी गोलार्ध के किसी ऊंचे स्थल पर निर्मित करना पड़ेगा, ताकि अल्फा सेंटारी सिस्टम को लक्षित किया जा सके।

l_Stephen-Hawking-1461575008इसके लिए चिली, दक्षिण अफ्रीका या अंटार्कटिका के किसी ऊंचे स्थल को चुना जा सकता है। प्रोफेसर हॉकिंग का कहना है कि इस नई प्रणोदक प्रणाली के बगैर हम बहुत दूर तक नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि प्रकाश सबसे ज्यादा व्यावहारिक टेक्नोलॉजी है। मिलनर ने पिछले साल प्रोफेसर हॉकिंग के साथ पारलौकिक सभ्यताओं के संकेत सुनने के लिए ब्रेक थ्रू लिसन प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। उसके तहत दस लाख तारों और 100 आकाशगंगाओं से एलियन के संकेत सुनने की चेष्टा की जाएगी। एक अन्य प्रोजेक्ट ब्रेक थ्रू मैसेज शुरू करने की भी घोषणा की गई थी। उसके तहत पारलौकिक सभ्यताओं को भेजे जाने वाले संदेशों को तैयार किया जाएगा। पिछले वर्ष मिलनर ने अंतरनक्षत्रीय अंतरिक्ष यात्र के लिए विभिन्न विकल्पों के बारे में विशेषज्ञों से विचार किया था। तभी से इस स्टारशॉट प्रोजेक्ट की प्लानिंग चल रही थी। देखना यह है कि प्रोजेक्ट व्यावहारिक रूप से कितना सफल हो पाएग

BREAK THROUGH STAR SHOT PROGRAME 

breakthrough-starshot-nanocraftहेलो STAR SHOT परियोजना यानी 250 खराब मिल दो सितारों तक पहुंचने के लिए चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने कहा है कि ऐसी सफलता के लिए भारत की मदद मिलना जरूरी है. स्पेस सेक्टर के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में 100 मिलियन डॉलर (लगभग 631 करोड़ रूपए) खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. ब्रेक थ्रू स्टार शॉट 7 250 खरब मील दूर सितारों तक पहुंचने के लिए चलाया जा रहा प्रोजेक्ट है.

भारत के सन्दर्भ में स्टार शॉट प्रोजेक्ट योजना 
इस प्रोजेक्ट के दौरान बहुत हल्के नैनो क्राफ्ट्स स्कोर अल्फा सेंचुरी तक भेजा जाएगा . यह पृथ्वी के सबसे करीब मौजूद स्टार सिस्टम जिसकी दूरी 25 ट्रिलियन मील है. नासा(NASA) के एमीस रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर रह चुके एस.पिट .बोर्डेन इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हैं . बोर्डेन ने कहा है कि ब्रेक थ्रू स्टार्स ऑफ प्रोजेक्ट की कामयाबी के लिए भारत की मदद मिलना बहुत जरुरी है, उन्होंने कहा कि स्पेस एक्सप्लोरेशन के मामले में भारत एक लीडर है तथा यह बात उसने मार्स मिशन के दौरान साबित कर दिया.  बॉर्डर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन इस प्रोजेक्ट में मदद करेगा. बतौर इस प्रोजेक्ट डायरेक्टर काम कर रहे बोर्डेन पिछले साल अगस्त में बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रो फिजिक्स भी आ चुकीं है.

प्रोजेक्ट के मुख्य बिंदु
phpThumb_generated_thumbnailब्रेक थ्रू स्टार शॉट प्रोजेक्ट का मकसद साइंस फिक्शन को हकीकत में बदलना है. इसमें यह कोशिश की जाएगी की जमीन से अल्ट्रा लाइट नैनो क्राफ्ट को अंतरिक्ष अंतरिक्ष में भेजा जाए. यह क्राफ्ट 1 घंटे में 100 मिलियन मील की दूरी तय करेंगे जिनके लॉन्चिंग के लिए लाइट बीमेर्स का यूज़ किया जाएगा. वर्तमान में काम में ली जाने वाली तकनीकी में एक स्पेसक्राफ्ट को मंगल ग्रह तक पहुंचने में 8 से 9 मिनट लगते हैं लेकिन यदि अगर यह प्रोजेक्ट कामयाब रहा  तो महज  30 मिनट में कोई भी नैनो क्राफ्ट मंगल तक पहुंच जाएगा . क्राफ्ट को प्लूटो तक पहुंचने में भी 10 साल की बजाय महज 72 घंटे लगेंगे. हालांकि इस प्रोजेक्ट का मकसद अल्फा सेंचुरी स्टार सिस्टम तक पहुंचना है ,लेकिन माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट सफल रहने पर अल्फा सेंचुरी तक पहुंचने में 20 साल तक का समय लगेगा.

प्रोजेक्ट की घोषणा कब की गई?
ब्रेक थ्रू स्टार शॉर्ट प्रोजेक्ट को 12 अप्रैल 2016 को रशियन अरबपति कारोबारी यूरी मिल्नर ने मशहूर कॉस्मोलॉजी स्टीफन हॉकिंग मौजूदगी मैं न्यूयॉर्क में घोषित किया था इस प्रोजेक्ट के बोर्ड मेंबर्स में facebook फाउंडर मार्क जुकेरबर्ग भी शामिल है

‘नैनोक्रॉफ्ट’ बनाएंगे दिग्गज वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग

  • विश्व प्रसिद्ध ब्रिटिश भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने मंगलवार को रूसी अरबपति यूरी मिल्नर और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के साथ मिलकर 10 करोड़ डॉलर की एक परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत तारों के बीच की अंतरिक्ष यात्रा के लिए छोटे अंतरिक्ष यान तैयार किए जाएंगे।
  • हॉकिंग और मिल्नर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क शहर में वन वर्ल्ड ऑब्सर्वेटरी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह संयुक्त घोषणा की।
  • ‘ब्रेकथ्रू स्टारशॉट’ नामक यह परियोजना एक अनुसंधान और इंजीनियरिंग परियोजना है, जिसका उद्देश्य वर्तमान से 1,000 गुना अधिक तीव्रता वाले लेजर बीम चालित नैनोक्रॉफ्ट अंतरिक्ष यान का निर्माण करना है।
  • मिल्नर के अनुसार, नैनोक्रॉफ्ट बन जाने के बाद उसे करीब 4.37 प्रकाश वर्ष दूर ‘अल्फा सेंच्युरी’ तारा तक पहुंचने में लगभग 20 वर्ष लगेंगे।
  • अल्फा सेंच्युरी सौर मंडल के सबसे नजदीकी तारा तंत्र में से है और मौजूदा सबसे तेज अंतरिक्ष यान को इसके पास जाने में करीब 30,000 साल लगेंगे।
  • नैनोक्रॉफ्ट ग्राम-स्केल रोबोटिक अंतरिक्षयान होते हैं, जिनके दो मुख्य भाग होते हैं। कंप्यूटर के आकार की स्टारचिप और एक लाइटसेल। यह स्टारचिप मानवनिर्मित होती है, जिसकी कीमत एक आईफोन के बराबर है।
  • खास बात है कि इस परियोजना की शुरुआत रूसी अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन द्वारा पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान की 55वीं सालगिरह पर हुई। 12 अप्रैल, 1961 को पूर्व सोवियत संघ के नागरिक यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में पहली बार कदम रखा था।
  • हॉकिंग ने कहा, “आज हम ब्रह्मांड में अगली बड़ी छलांग लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि हम मानव हैं और हमारी प्रकृति उड़ान भरने की है।”

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