स्टैंड अप इंडिया योजना

6 जनवरी 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजातियों एवं महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टैंड अप इंडिया योजना को मंजूरी दे दी. योजना का उद्देश्य प्रत्येक उद्यमी वर्ग के लिए औसतन प्रति बैंक शाखा न्यूनतम दो परियोजनाओं को सरल बनाना है. योजना से 2.5 लाख उधारकर्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है.
कम– से– कम 2.5 लाख मंजूरी का यह लक्ष्य योजना के शुरु होने के 36 माह के भीतर प्राप्त करना तय किया गया है.

 

स्टैंड अप इंडिया योजना की मुख्य विशेषताएं

• 10,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक धनराशि के साथ भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के माध्यम से पुनर्वित्त खिड़की (रिफाइनैंस विंडो)
• यह राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) के जरिए क्रेडिट गारंटी तंत्र बनाएगा.
• यह उधारकर्ताओं को ऋण पूर्व चरण और संचालन दोनों ही के दौरान समर्थन मुहैया कराएगा.
• इसका फोकस एससी/एसटी और महिला उधारकर्ताओं को समर्थन देना है.
• इसका उद्देश्य 7 वर्ष तक बैंक का कर्ज चुकाने की सुविधा के साथ आबादी के पिछड़ों तक संस्थागत ऋण संरचना का लाभ पहुंचाना और एससी, एसटी और महिला उधारकर्ताओं द्वारा गैरकृषि क्षेत्र वाले सेटअप में ग्रीनफिल्ड इंटरप्राइजेज के लिए 10 लाख रुपयों से 100 लाख रुपयों के बीच की धनराशि उपलब्ध कराना है.
• इस योजना के तहत ऋण उचित तरीके से संरक्षित एवं ऋण गारंटी योजना के माध्यम से ऋण गारंटी द्वारा समर्थित होगा. इसके लिए वित्तीय सेवा विभाग निपटानकर्ता होगा.
• राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) ऋण के लिए संचालक एजेंसी होगी.
• संयुक्त ऋण की मार्जिन मनि 25 फीसदी तक होगा.
15 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में स्टार्ट अप इंडिया स्टैंड अप इंडिया पहल की घोषणा की थी.

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